छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, सरगुजा, जशपुर, मेनपाट क्षेत्र आलू की खेती के लिए सबसे उपयुक्त माने जाते हैं. सरगुजा जिले का हर किसान आलू उगाता है. रवि फसल के समय में हमेशा किसानों के खेतों में आलू लगा हुआ नजर आता है. घर पर लाल आलू खाने के लिए किसान एक एकड़ में पांच-दसवां आलू लगाते हैं. धान की फसल के बाद का मौसम आलू की खेती के लिए उपयुक्त होता है. आमतौर पर इसकी तैयारी नवंबर से शुरू हो जाती है.
90 से 100 दिन की फसल
आलू की एक नई बायोफोर्टिफाइड किस्म “कुफरी जमुनिया” है. आलू की यह किस्म बैंगनी रंग की, पोषक तत्वों से भरपूर होती है. किसान इस साल आलू की इस किस्म की खेती कर अच्छी आमदनी कमा सकते हैं. आलू की यह किस्म मध्यम अवधि और अधिक उपज देने वाली नई उन्नत किस्म है. यह बुआई से लेकर कटाई तक लगभग 90 से 100 दिन में तैयार हो जाती है. इसकी औसत उपज 32-35 टन प्रति हेक्टेयर है. और इसे सामान्य आलू की तुलना में अधिक समय तक भंडारित किया जा सकता है. इसका स्वाद अन्य आलू की किस्मों से कही अधिक बेहतर होता है.
इन राज्यों में खेती की जा सकती है
इस किस्म के आलू को सामान्य आलू की तुलना में अधिक दिनों तक भंडारित किया जा सकता है. साथ ही इसका स्वाद भी सामान्य आलू से बेहतर होता है. कुफरी जमुनिया की सिफारिश हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड (मेदान), मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, गुजरात, उड़ीसा, असम, पश्चिम बंगाल और बिहार के लिए की जाती है.