पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण, तो पितरों का पूर्णिमा श्राद्ध कब होगा, ज्योतिर्विद से जानें

इस साल पितृपक्ष में एक नहीं, बल्कि एक साथ दो ग्रहण लग रहे हैं। पहला पूर्ण चंद्रग्रहण भाद्रपद मास की पूर्णिमा को यानी 7 सितंबर से लग रहा है,वहीं दूसरा सूर्य ग्रहण होगा, जो 21 सितंबर को पितृपक्ष की अमावस्या यानी श्राद्ध पक्ष के आखिर में लगेगा।
पितरों को तर्पण के लिए पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू हो रहा है। आपको बता दें कि चंद्रग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले से लग जाता है। ऐसे में चंद्रग्रहण का सूतक काल 12.57 मिनट से शुरू हो जाएगा। अब अधिकतर लोगों के मन में सवाल है कि क्या पितृपक्ष पूर्णिमा पर चंद्रग्रहण के कारण क्या इस दिन पितरों का श्राद्ध होगा। ऐसे में आप ज्योतिर्विद से जान सकते हैं।
ज्योतिर्विद पं. दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली ने बताया कि सात सितंबर को पितृ पक्ष का मुख्य समय महालय प्रारंभ होने जा रहा है। जिसमें चंद्रग्रहण का संयोग 19 वर्षों बाद आया है। पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध कर्म भाद्रपद शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को ही किया जाता है, जो सात सितंबर (रविवार) को ही होगा। इसलिए पितरों के श्राद्ध आदि को लेकर कंफ्यूज ना हों। सूतक 12.57 से लग रहे हैं, इसलिए तर्पण इससे पहले कर सकते हैं। आपको बता दें कि पितृपक्ष में ग्रहण से दान पुण्य का फल और अधिक बढ़ जाता है। इसलिए श्राद्ध के बाद और चंद्रग्रहण के बाद भी पितरों के लिए दान कर सकते हैं, जो बहुत पुण्यफल देने वाला होता है। जिस तिथि पर पितृ देव दिवंगत हुए होते है, उसी तिथि पर पितृपक्ष में तिथियों के अनुसार श्राद्ध कर्म व तर्पण किया जाना शास्त्र सम्मत होता है। प्रतिपदा का श्राद्ध व तर्पण आठ सितंबर को किया जाएगा। निदेशक ने बताया कि प्रयागराज में सात को खग्रास चंद्रग्रहण का आरंभ रात्रि 9.45 बजे से आरंभ होगा और ग्रहण का मध्य समय रात्रि 11.41 बजे होगा। इसका मोक्ष अर्थात ग्रहण की समाप्ति मध्यरात्रि 1.27 बजे होगा।


