छत्तीसगढ़

गरियाबंद: बाढ़ से लाखों की मक्का फसल बर्बाद, किसानों को साहूकारी कर्ज चुकाने की चिंता, प्रशासन से मुआवजे की मांग

बरही नदी में बाढ़ ने मक्का और धान की फसल चौपट की, 100 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र प्रभावित, किसान मुआवजे की मांग पर अड़े

गरियाबंद। मानसून विदाई के बावजूद पिछले चार दिनों से लगातार हुई मूसलाधार बारिश ने गरियाबंद जिले में किसानों की फसल बर्बाद कर दी है। बरही नदी में आए बाढ़ के चलते अमाड़ ग्राम के 9 से ज्यादा किसानों की लगभग 15 एकड़ में 6 लाख रुपए की मक्का और धान की फसल चौपट हो गई। देवभोग तहसील के अमलीपदर क्षेत्र में नदी-नाले किनारे बोए गए 100 एकड़ से ज्यादा क्षेत्र में 40 लाख रुपए से अधिक का मक्का फसल बर्बाद होने का अनुमान है।

साहूकारी कर्ज की चिंता

किसानों ने बताया कि फसल के लिए उन्होंने 2 लाख रुपए से अधिक साहूकारी कर्ज लिया था। मक्का की अच्छी पैदावार होने के बावजूद बाढ़ के कारण फसल बर्बाद हो गई, जिससे न केवल उन्हें नुकसान हुआ बल्कि अब कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो गया। पीड़ित किसानों ने प्रशासन से फसल क्षतिपूर्ति और उचित मुआवजे की मांग की है।

पुल निर्माण ने बढ़ाई बाढ़ की मार

ओडिसा और छत्तीसगढ़ को जोड़ने वाला पुलिया निर्माण भी किसानों के लिए समस्या बन गया है। नवरंगपुर जिले के चंदहांडी ब्लॉक के लोगों को कालाहांडी से जोड़ने के लिए ओडिसा सरकार ने 10 साल पहले 30 मीटर बॉक्स कल्वर्ट पुल बनाया था। यह पुल छत्तीसगढ़ के भूभाग में स्थित है और बाढ़ के समय इसे पार करने पर किसानों की फसल प्रभावित होती है।

प्रशासन की कार्रवाई

देवभोग तहसीलदार अजय कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि लगातार बारिश और बाढ़ से फसल और मकान के नुकसान की सूचना मिल रही है। उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में पटवारियों की टीम गठित कर नुकसान का आंकलन किया जाएगा और रिपोर्ट ऊपर भेजी जाएगी।

बाढ़ के दौरान जोखिम

त्रिवेणी संगम लबालब होने के बावजूद लोग सेल्फी और रियल बनाते नजर आए। वहीं, देवभोग तहसील मुख्यालय तक जाने वाले इकलौते मार्ग पर स्थित बेलाट नाला पर आवाजाही भी जानलेवा स्थिति में रही। पिछले तीन दिनों में दर्जनों हादसे इस नाले में हो चुके हैं, जबकि सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।

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