धरसींवा फैक्ट्री में बाल श्रमिकों का शोषण, महिलाओं से 12 घंटे काम कराया गया
ठेकेदार तिवारी पर श्रम कानून उल्लंघन और बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज, प्रशासन ने की कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

धरसींवा। महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग और बाल संरक्षण इकाई की संयुक्त टीम ने धरसींवा क्षेत्र की एक फैक्ट्री और श्रमिक कॉलोनी में छापेमारी कर बाल श्रमिकों को मुक्त कराया। फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों और महिलाओं से रोजाना 12 घंटे तक काम लिया जा रहा था, जबकि उन्हें न्यूनतम मजदूरी भी नहीं दी जा रही थी।
संयुक्त टीम ने तहसीलदार धरसींवा बाबूलाल कुर्रे, महिला पुलिस अधिकारी नंदिनी ठाकुर और महिला एवं बाल विकास अधिकारी संजय निराला के नेतृत्व में फैक्ट्री में निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि बाल श्रमिक मशीनों के पास कार्यरत हैं। बच्चों और मजदूरों से पूछताछ में सामने आया कि महिलाओं को ₹370 और पुरुषों को ₹450 प्रतिदिन मजदूरी दी जा रही थी, जबकि श्रम कानून के अनुसार 12 घंटे काम का उचित वेतन ₹860 होना चाहिए था।
श्रम कानून उल्लंघन
श्रम निरीक्षक ने बताया कि फैक्ट्री में श्रम कानूनों का उल्लंघन स्पष्ट था। मजदूरों से निर्धारित समय से अधिक काम लिया जा रहा था, लेकिन उन्हें उचित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं जैसे ESIC और PF नहीं दी जा रही थीं। कई मजदूर बिना लिखित अनुबंध के काम कर रहे थे।
बाल श्रमिकों की सुरक्षा पर चिंता
महिला एवं बाल विकास अधिकारी संजय निराला ने बताया कि बाल श्रमिकों को खतरनाक मशीनों के पास काम कराया जा रहा था। बाल श्रमिकों को तुरंत बाल संरक्षण इकाई के तहत सुरक्षित स्थान पर भेजा गया और उनके पुनर्वास की तैयारी शुरू कर दी गई है।
प्रशासन ने दी कड़ी चेतावनी
तहसीलदार बाबूलाल कुर्रे ने कहा कि फैक्ट्री में बाल श्रम निषेध अधिनियम और श्रम कानूनों का उल्लंघन पाया गया है। दोषी ठेकेदार तिवारी और फैक्ट्री प्रबंधन के खिलाफ जांच रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस कार्रवाई के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी और फैक्ट्री की श्रमिक पंजी और रिकॉर्ड की जांच की जाएगी।
स्थानीय श्रमिक संगठनों ने बताया कि पिछले कई महीनों से मजदूरी शोषण और बाल श्रम की शिकायतें मिल रही थीं। प्रशासन की तत्परता और संयुक्त टीम की कार्रवाई के कारण इस गंभीर मामले का खुलासा समय रहते किया गया।



