CG Breaking News: तीन जिलों की अदालतों को उड़ाने की धमकी, एक ई-मेल से मच गया हड़कंप!
अंबिकापुर, राजनांदगांव और जगदलपुर कोर्ट खाली, बम स्क्वॉड और डॉग स्क्वॉड तैनात

अंबिकापुर/जगदलपुर।
छत्तीसगढ़ में न्याय व्यवस्था को दहला देने वाली सनसनीखेज धमकी सामने आई है। अंबिकापुर, राजनांदगांव और जगदलपुर के जिला एवं सत्र न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। यह धमकी ई-मेल के जरिए दी गई, जिसके तुरंत बाद तीनों कोर्ट परिसरों को खाली करा लिया गया।
सुबह आया धमकी भरा मेल, पुलिस-प्रशासन अलर्ट
जानकारी के अनुसार, तीनों जिलों के कोर्ट कार्यालय के आधिकारिक ई-मेल पर सुबह के समय एक संदिग्ध मेल प्राप्त हुआ, जिसमें कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की बात कही गई थी। मेल मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूरे परिसर को सील कर सघन तलाशी अभियान शुरू किया गया। सुरक्षा के मद्देनज़र अदालतों में मौजूद कर्मचारियों, वकीलों और आम लोगों को बाहर निकाल दिया गया।
राजनांदगांव कोर्ट को दूसरी बार मिली धमकी
सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि राजनांदगांव जिला न्यायालय को यह दूसरी बार धमकी भरा ई-मेल मिला है। बताया जा रहा है कि करीब 10 बजे के आसपास एक और मेल आया, जिसके बाद प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया।
कोर्ट परिसर में डॉग स्क्वॉड और बम डिस्पोजल स्क्वॉड (BDS) की टीमों ने मोर्चा संभाल लिया और कोने-कोने की तलाशी ली गई।
पहले भी मिल चुकी हैं ऐसी धमकियां
गौरतलब है कि एक माह पहले भी राजनांदगांव जिला न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। इससे पहले बिलासपुर जिला कोर्ट को भी इसी तरह की धमकी भेजी जा चुकी है, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।
पुलिस का बयान: कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली
एडिशनल एसपी कीर्तन राठौर ने बताया कि अज्ञात व्यक्ति द्वारा ई-मेल के माध्यम से बम की सूचना दी गई थी। एहतियातन BDS टीम द्वारा तत्काल जांच कराई गई, लेकिन अब तक कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि ई-मेल की स्रोत से जांच की जा रही है और जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार किया जाएगा।
सवालों के घेरे में कोर्ट की सुरक्षा
लगातार मिल रही धमकियों ने कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह सिर्फ अफवाह है या किसी बड़ी साजिश का हिस्सा? पुलिस और खुफिया एजेंसियां हर एंगल से जांच में जुटी हैं।
फिलहाल हालात काबू में बताए जा रहे हैं, लेकिन एक ई-मेल ने पूरे न्यायालय तंत्र को हिला कर रख दिया है।
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