छत्तीसगढ़

इस बार केमिकल नहीं… जंगलों के फूलों से सजेगी होली! गरियाबंद की महिलाओं ने रच दी रंगों की नई क्रांति

पलाश, अपराजिता और चुकंदर से बन रहा हर्बल गुलाल… बाजार में बढ़ी मांग, आत्मनिर्भरता की नई कहानी

गरियाबंद। इस बार होली के रंग सिर्फ चेहरे ही नहीं, बल्कि किस्मत भी चमकाने वाले हैं। जिले के ग्राम सढ़ौली की महिलाएं प्राकृतिक रंगों से ऐसी होली की तैयारी कर रही हैं, जो सेहत के लिए सुरक्षित और पर्यावरण के लिए अनुकूल है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के तहत राखी महिला ग्राम संगठन की 10 सक्रिय महिलाएं हर्बल गुलाल तैयार कर रही हैं। यह पहल न केवल त्योहार को खास बना रही है, बल्कि महिलाओं की आय का मजबूत जरिया भी बन रही है।


🌿 जंगलों के फूलों से तैयार हो रहे रंग

महिलाएं पलाश (टेसू) के फूलों से पीला, चुकंदर और गुलाब की पंखुड़ियों से लाल, पालक और मेहंदी के पत्तों से हरा, अपराजिता के फूलों से नीला रंग तैयार कर रही हैं। इन प्राकृतिक रंगों को मक्के की सूखी डंठल से बने अरारोट पाउडर में मिलाकर शुद्ध और सुरक्षित गुलाल बनाया जा रहा है।

इसमें किसी भी प्रकार के हानिकारक रासायनिक तत्व का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे यह त्वचा और स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह सुरक्षित रहता है।


💰 पिछले साल 30 हजार से ज्यादा की बिक्री

समूह की पीआरपी मीना साहू ने बताया कि पिछले वर्ष 30 हजार रुपये से अधिक की बिक्री हुई थी, जिसमें लगभग 10 हजार रुपये से ज्यादा का शुद्ध मुनाफा हुआ। इस बार बढ़ती मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया गया है।

समूह में अध्यक्ष ललिता काशी, सचिव लक्ष्मी शांडिल्य, कोषाध्यक्ष ओम साहू समेत कई महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों से गुलाल तैयार कर रही हैं और आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं।


👏 प्रशासन ने भी की सराहना

कलेक्टर बी.एस. उइके और जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने महिलाओं के प्रयासों की सराहना की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं की यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है।


अब सवाल यह है—क्या इस बार बाजार के केमिकल रंगों की जगह जंगलों की खुशबू वाली होली छाएगी?

गरियाबंद की महिलाएं तो तैयार हैं… क्या आप भी इस बार प्राकृतिक रंगों से होली खेलने के लिए तैयार हैं?

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