छत्तीसगढ़

सुसाइड नोट में लिखा दर्द… लेकिन प्रेमी पर नहीं लगा आरोप! हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, केस से हुआ बरी

प्रेम संबंध टूटना या शादी से इनकार करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं—छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज कर सुनाया अहम फैसला


बिलासपुर।
प्रेम संबंध और आत्महत्या से जुड़े एक चर्चित मामले में Chhattisgarh High Court ने बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि सिर्फ प्रेम संबंध टूट जाना या शादी से इनकार करना किसी व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

यह फैसला Justice Sanjay S. Agrawal की एकलपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए सत्र न्यायालय के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी युवक को पहले ही दोषमुक्त कर दिया गया था।

प्रेम कहानी का दुखद अंत

मामला Bilaspur जिले के Chakarbhatha थाना क्षेत्र का है। यहां रहने वाले सुनील कुमार साहू और 21 वर्षीय युवती के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन युवक के माता-पिता इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे।

इसी बीच साल 2016 में युवती ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आरोप लगाया गया कि घटना से कुछ दिन पहले दोनों के बीच विवाद हुआ था और युवक ने शादी से इनकार कर दिया था, जिससे आहत होकर युवती ने यह कदम उठा लिया।

सुसाइड नोट में नहीं था प्रेमी का जिक्र

पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की और करीब डेढ़ महीने बाद युवक के खिलाफ Indian Penal Code Section 306 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया। उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया।

हालांकि जांच के दौरान युवती के पास से मिला सुसाइड नोट इस मामले में अहम साबित हुआ। उस नोट में कहीं भी आरोपी युवक पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप नहीं लगाया गया था।

गवाहों की गवाही भी साबित नहीं कर पाई आरोप

मामले में युवती की बहन, पिता और मां को गवाह बनाया गया। बहन ने प्रेम संबंध और शादी की बात स्वीकार की, लेकिन शादी से इनकार की बात उसने सीधे आरोपी से नहीं सुनी थी। दूसरी बहन भी आत्महत्या के कारण को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दे सकी।

वहीं युवती के पिता ने बताया कि वे इस शादी के लिए तैयार थे, लेकिन युवक के पिता राजी नहीं थे। मां ने भी इनकार की बात सुनी होने की बात कही, लेकिन यह स्वीकार किया कि उनके सामने ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई थी।

पहले भी बरी हो चुका था आरोपी

मामले में 23 जनवरी 2017 को चौथे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने आरोप सिद्ध नहीं होने पर आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था। इसके खिलाफ राज्य शासन ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 306 के तहत सजा देने के लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी ने आत्महत्या के लिए प्रत्यक्ष रूप से उकसाया या प्रेरित किया हो।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि
“केवल प्रेम संबंध टूट जाना या विवाह से इनकार कर देना, अपने आप में आत्महत्या के लिए उकसाने का सबूत नहीं माना जा सकता।”

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