35 साल की नौकरी फर्जी निकली? आबकारी अफसर पर बड़ा खुलासा… बिलासपुर से जुड़ा ‘सीक्रेट’ आया सामने!
फर्जी जाति प्रमाणपत्र से बनी करियर की नींव, अब आयोग का नोटिस… 15 दिन में देना होगा जवाब

बिलासपुर। एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने सरकारी सिस्टम पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्यप्रदेश में पदस्थ एक आबकारी अफसर पर आरोप है कि उसने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर 35 साल तक नौकरी की—और अब इस पूरे खेल की कड़ी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से जुड़ती नजर आ रही है।
🕵️ फर्जी प्रमाणपत्र से बनी नौकरी की नींव
मामला ग्वालियर में पदस्थ आबकारी अफसर राजेश हेनरी से जुड़ा है। आरोप है कि उन्होंने साल 1990-91 में आपराधिक षड्यंत्र के तहत फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनवाया और खुद को अनुसूचित जनजाति (ST) का बताकर नौकरी हासिल की।
बताया जा रहा है कि इसी फर्जी दस्तावेज के सहारे वे पिछले 35 वर्षों से आबकारी विभाग में सेवाएं दे रहे हैं।
📍 बिलासपुर कनेक्शन ने बढ़ाई सनसनी
जांच में सामने आया कि जिस जाति प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किया गया, उसमें बिलासपुर तहसील की सील और साइन लगे हुए हैं।
लेकिन जब रिकॉर्ड खंगाले गए तो चौंकाने वाला सच सामने आया—
👉 उस समय के रजिस्टर में इस प्रमाणपत्र का कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला!
यानी दस्तावेज पूरी तरह संदिग्ध और फर्जी होने की आशंका गहरा गई है।
⚠️ 2 साल से अटकी जांच, अब आयोग का बड़ा एक्शन
छत्तीसगढ़ की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण समिति ने इस मामले की जांच जिला स्तरीय समिति को सौंपी थी, लेकिन यह जांच पिछले 2 साल से लंबित पड़ी थी।
अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए:
-
बिलासपुर कलेक्टर
-
मध्यप्रदेश आबकारी विभाग के मुख्य सचिव
को नोटिस जारी कर 15 दिन में जवाब मांगा है।
📢 RTI से हुआ बड़ा खुलासा
इस पूरे मामले को उजागर किया है इंदौर के वकील और RTI एक्टिविस्ट राजेंद्र गुप्ता ने।
उन्होंने RTI के जरिए दस्तावेज जुटाकर दावा किया कि:
👉 विभाग के कई अधिकारियों को इस फर्जीवाड़े की जानकारी थी
👉 इसके बावजूद सालों तक मामले को दबाया जाता रहा
👉 आरोपी अफसर को बचाने की कोशिश होती रही
❗ अब क्या होगा आगे?
इस खुलासे के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
👉 सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या 35 साल की नौकरी पर अब कार्रवाई होगी?
और क्या इस फर्जीवाड़े में शामिल अन्य लोग भी सामने आएंगे?


