छत्तीसगढ़

5000 की रिश्वत… 20 साल बाद पलटा पूरा केस, मौत के बाद हाईकोर्ट ने कहा– सबूत नहीं, आरोपी बेगुनाह

सिर्फ पैसे मिलने से नहीं बनता अपराध, कोर्ट ने रद्द की सजा

बिलासपुर में दो दशक पुराने रिश्वत मामले में बड़ा मोड़ सामने आया है, जहां छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने आरोपी को बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति रजनी दुबे की एकलपीठ ने सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाई गई सजा को निरस्त करते हुए साफ कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार किए जाने को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।

यह मामला वर्ष 2004 का है, जब साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड में पदस्थ कर्मचारी माइकल मसीह ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन पर्सनल मैनेजर जितेंद्र नाथ मुखर्जी ने उनके पीएफ से अग्रिम राशि स्वीकृत कराने के लिए 5000 रुपये रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद सीबीआई ने ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी को उसके घर से कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। इसके बाद 2006 में रायपुर की विशेष सीबीआई अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी की मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनकी पत्नी ने कानूनी प्रतिनिधि के रूप में अपील को आगे बढ़ाया। हाईकोर्ट ने विस्तृत सुनवाई में कई गंभीर खामियां पाईं और कहा कि रिश्वत मांगना ऐसे मामलों का सबसे अहम तत्व होता है, लेकिन इस केस में यह केवल शिकायतकर्ता के बयान पर आधारित था, जिसे किसी स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य से पुष्ट नहीं किया जा सका।

अदालत ने यह भी कहा कि केवल पैसे की बरामदगी से अपराध सिद्ध नहीं होता। जिस आवेदन के आधार पर रिश्वत मांगी गई थी, उसका मूल दस्तावेज तक पेश नहीं किया गया और गवाहों के बयान भी आपस में मेल नहीं खाते थे। ट्रैप गवाहों ने सिर्फ पैसे मिलने की बात कही, लेकिन रिश्वत मांगने की पुष्टि नहीं कर सके।

आरोपी के बचाव में दिए गए बयान को भी कोर्ट ने पूरी तरह खारिज नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि शिकायतकर्ता ने जबरन पैसे देने की कोशिश की और हाथ झटकने पर रकम जमीन पर गिर गई। अदालत ने माना कि यह संभावना परिस्थितियों से पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।

अंततः हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार के मामलों में रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार करना दोनों साबित होना जरूरी है। केवल रकम की बरामदगी के आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने आरोपी की सजा और दोषसिद्धि को पूरी तरह रद्द करते हुए उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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