छत्तीसगढ़

क्या सच में खत्म होने वाला है नक्सलवाद? सांसद के बड़े दावे ने बढ़ाई हलचल, विकास को लेकर कही चौंकाने वाली बात

नक्सलवाद के अंत को बताया करीब, साथ ही मिडिल ईस्ट संकट और विपक्ष पर भी साधा निशाना

छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद के खात्मे को लेकर एक बड़ा और अहम बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक और सुरक्षा दोनों हलकों में हलचल बढ़ा दी है। रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने दावा किया कि देश से नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प अब पूरा होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बधाई देते हुए कहा कि आने वाले समय में देश नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो सकता है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद विकास की किरणें जरूर पहुंचीं, लेकिन नक्सलवाद एक बड़ी बाधा बना रहा। अब जब यह समस्या समाप्ति की ओर है, तो प्रदेश के दूरस्थ और आदिवासी इलाकों में तेजी से विकास होगा और वहां तक मूलभूत सुविधाएं पहुंच पाएंगी। उनके इस बयान ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में बस्तर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों की तस्वीर बदल सकती है।

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव को लेकर भी उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि देश को हर स्थिति के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने कोरोना काल का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह पूरे देश ने एकजुट होकर उस संकट का सामना किया था, उसी तरह भविष्य की चुनौतियों का भी सामना किया जाएगा। साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आपदा के समय में ब्लैक मार्केटिंग या मुनाफाखोरी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में राजनीति करने के बजाय जनता का मनोबल बढ़ाना ज्यादा जरूरी है। बस्तर में फोर्स की तैनाती को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में ट्रिपल इंजन सरकार काम कर रही है और किसी भी प्रकार की जरूरत को मिलकर पूरा किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अब राज्य को पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आर्थिक सहयोग मिल रहा है और जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार पूरी मदद करेगी।

इसके अलावा उन्होंने विधानसभा में गलत जानकारी देने वाले अधिकारियों पर भी सख्त रुख अपनाने की बात कही। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में कार्रवाई संभव है, लेकिन इसके लिए जनप्रतिनिधियों को भी सतर्क और सक्रिय रहना होगा। उनका कहना था कि यदि कोई अधिकारी गुमराह करता है या गलत जानकारी देता है, तो उसे जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

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