छत्तीसगढ़
डेडलाइन से एक दिन पहले हुआ बड़ा खेल, जंगलों का खूंखार चेहरा अचानक पहुंचा शहर, सुरक्षा एजेंसियां भी रह गईं सन्न
सालों से सुरक्षा बलों के लिए सिरदर्द बना कुख्यात नक्सली अचानक सामने आया, आत्मसमर्पण के पीछे छिपे राजों ने बढ़ाई हलचल


आंध्र प्रदेश से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने नक्सल विरोधी अभियान की दिशा ही बदल दी है। छत्तीसगढ़ से सटे इलाके में लंबे समय से सक्रिय और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना कुख्यात माओवादी चेल्लुरु नारायण राव उर्फ सोमन्ना ने अचानक आत्मसमर्पण कर दिया है। यह सरेंडर उस वक्त हुआ, जब देश से नक्सलवाद खत्म करने की तय डेडलाइन में महज एक दिन बाकी था।
सूत्रों के मुताबिक, सोमन्ना ने विजयवाड़ा में आत्मसमर्पण किया। उसका नाम माओवादी संगठन के बड़े चेहरों में गिना जाता था। वह न सिर्फ स्टेट कमेटी का सदस्य था, बल्कि आंध्र-ओडिशा बॉर्डर क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों का अहम हिस्सा भी रहा है। इसके अलावा केंद्रीय क्षेत्रीय समिति की तीसरी कंपनी का कमांडर होने के कारण वह कई बड़े ऑपरेशनों की रणनीति तय करता था।
जानकारों की मानें तो शीर्ष माओवादी नेताओं गजरला रवि और अरुणा की मौत के बाद इस पूरे इलाके की कमान सोमन्ना के हाथों में आ गई थी। उसके फैसलों का असर सीधे जमीन पर दिखता था और सुरक्षा बलों के लिए वह एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सालों तक जंगलों में छिपा रहने वाला यह खतरनाक चेहरा अचानक शहर पहुंच गया और हथियार डाल दिए। क्या यह दबाव का असर है, या फिर संगठन के भीतर कुछ ऐसा चल रहा है, जो बाहर आना बाकी है।
गौरतलब है कि सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य तय किया है। इस डेडलाइन से ठीक पहले सोमन्ना जैसे बड़े नक्सली का आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ ही कई नए सवाल भी खड़े हो गए हैं, जिनके जवाब आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं।