आखिरी दिन दंतेवाड़ा में हुआ बड़ा उलटफेर, जंगल से निकले 5 चेहरे… जिन पर था लाखों का साया
सरकार की तय समय सीमा खत्म होते ही 5 इनामी नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, कई बड़े नाम सामने आए

दंतेवाड़ा। लंबे समय से सन्नाटे और खौफ के लिए पहचाने जाने वाले इलाकों से अचानक ऐसी खबर सामने आई, जिसने सुरक्षा एजेंसियों से लेकर स्थानीय लोगों तक को चौंका दिया। सरकार द्वारा तय नक्सली खात्मे की समय सीमा के अंतिम दिन दंतेवाड़ा में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब जंगलों में सक्रिय पांच नक्सलियों ने अचानक सामने आकर आत्मसमर्पण कर दिया।
यह आत्मसमर्पण बस्तर आईजी सुंदरराज पी., केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के डीआईजी राकेश और दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के समक्ष हुआ। खास बात यह रही कि आत्मसमर्पण करने वालों में कई ऐसे नाम शामिल हैं, जिन पर लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की नजर थी और जिन पर इनाम भी घोषित था।
इनमें भैरमगढ़ एरिया कमेटी सदस्य सोमें कड़ती का नाम सबसे प्रमुख रहा। बीजापुर जिले के मिरतुर थाना क्षेत्र के चेरली गांव की रहने वाली इस नक्सली लीडर पर राज्य शासन ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। इसके अलावा भैरमगढ़ एरिया कमेटी के ही सदस्य लखमा पोयाम ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा का रास्ता चुना। वह भी बीजापुर जिले के मिरतुर थाना क्षेत्र के बेचापाल का निवासी है और उस पर 1 लाख रुपये का इनाम था।
इसी क्रम में सरिता पोडियाम, जो भैरमगढ़ एरिया कमेटी से जुड़ी रही है, ने भी आत्मसमर्पण किया। वह बीजापुर जिले के जांगला थाना क्षेत्र के हिंगुम गांव की निवासी है। जोगी कलमू ने भी घर वापसी करते हुए हथियार छोड़ दिए। वह बासागुड़ा थाना क्षेत्र के नेंड्रा गांव की रहने वाली है। इसके अलावा गंगालूर एरिया कमेटी से जुड़े मोटी ओयाम ने भी आत्मसमर्पण किया, जो गंगालूर थाना क्षेत्र के पीडिया गांव का निवासी है। इन पार्टी सदस्यों पर भी राज्य शासन द्वारा एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था।
बताया जा रहा है कि इन सभी ने नक्सली विचारधारा और जंगल के जीवन से तंग आकर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति को भी इस बदलाव की बड़ी वजह माना जा रहा है।
हालांकि इस सामूहिक आत्मसमर्पण ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं कि क्या यह केवल शुरुआत है या फिर जंगल के भीतर कुछ और बड़ा बदल रहा है, जिसकी आहट अब धीरे-धीरे बाहर आने लगी है।

