बंगाल में सियासी खेल का खौफनाक क्लाइमेक्स, 152 सीटों पर चौंकाने वाला दावा, क्या 4 मई को पलट जाएगी पूरी सत्ता

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है। पहले चरण की भारी मतदान के बाद सियासी गलियारों में जो हलचल तेज हुई है, उसने आने वाले परिणामों को लेकर रहस्य और भी गहरा कर दिया है। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने ऐसा दावा किया है, जिसने पूरे चुनावी समीकरण को हिला कर रख दिया है।
पहले चरण के मतदान के बाद अमित शाह ने कहा कि भाजपा 152 में से 110 से ज्यादा सीटें जीत सकती है और 4 मई के बाद बंगाल में सरकार बनना लगभग तय है। उनके इस बयान ने न सिर्फ राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है, बल्कि यह संकेत भी दे दिया है कि इस बार मुकाबला बेहद निर्णायक होने जा रहा है।
23 अप्रैल को 16 जिलों की 152 सीटों पर हुए मतदान में रिकॉर्ड भागीदारी देखने को मिली। कई सीटों पर वोटिंग प्रतिशत 92 फीसदी के पार पहुंच गया। भाजपा इसे बदलाव की लहर का संकेत मान रही है। अमित शाह का कहना है कि जनता ने पहले ही चरण में अपना रुख साफ कर दिया है और यह चुनाव परिणामों में बड़ा उलटफेर ला सकता है।
अपने बयान में उन्होंने बंगाल की ऐतिहासिक विरासत का जिक्र करते हुए Rabindranath Tagore, Subhas Chandra Bose और खुदीराम बोस की धरती को परिवर्तन की भूमि बताया। उन्होंने कहा कि यह राज्य अब विकास की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए तैयार है और प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में नई शुरुआत होने वाली है।
शाह ने सीधा हमला करते हुए कहा कि “दीदी जाने वाली हैं, भाजपा आने वाली है”। उनका दावा है कि दूसरे चरण के मतदान के बाद भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलना तय है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे बिना किसी डर के मतदान करें और पुराने चुनावी डर को पीछे छोड़ दें।
इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की रिकॉर्ड भागीदारी रही है। आंकड़ों के अनुसार, पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया है, जिसने राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। माना जा रहा है कि यह फैक्टर इस बार सत्ता के समीकरण बदल सकता है।
Mamata Banerjee पर निशाना साधते हुए शाह ने कहा कि भय और तुष्टीकरण की राजनीति अब खत्म होने वाली है। उन्होंने यह भी साफ किया कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद घुसपैठ और अवैध कब्जों के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की जाएगी और राज्य को नई दिशा दी जाएगी।
चुनावी हिंसा को लेकर भी उन्होंने बड़ा बयान दिया। शाह ने कहा कि इस बार पहले चरण में कोई मौत नहीं हुई, जो बंगाल जैसे राज्य के लिए असामान्य है। उन्होंने चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए इसे ‘शांतिपूर्ण चुनाव’ का संकेत बताया।
अब नजरें 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण और 4 मई की मतगणना पर टिकी हैं। सवाल वही है जो हर किसी के मन में घूम रहा है—क्या सच में 110+ सीटों का दावा हकीकत बनेगा या फिर आखिरी वक्त में कोई बड़ा सियासी उलटफेर सबको चौंका देगा।
फिलहाल, बंगाल की हवा में जो बेचैनी है, वह आने वाले नतीजों से पहले के तूफान का साफ संकेत दे रही है।