लोकभवन में क्या हुआ ऐसा कि सन्न रह गईं छात्राएं? राज्यपाल की बातों ने बदल दी सोच
अनुशासन, सफलता और जीवन के रहस्यों पर खुलकर बोले राज्यपाल, छात्राओं के सवालों ने भी खोल दिए कई अनकहे पहलू

रायपुर, 29 अप्रैल 2026। राजधानी रायपुर के लोकभवन में उस वक्त माहौल अचानक गंभीर और प्रेरणादायक बन गया, जब राज्यपाल श्री रमेन डेका संत गोविंद राम शदाणी शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय, देवेंद्र नगर की छात्राओं से सीधे रूबरू हुए। यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं रही, बल्कि ऐसी बातचीत में बदल गई जिसने छात्राओं की सोच को झकझोर कर रख दिया।
छत्तीसगढ़ मण्डपम में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल ने छात्राओं से शिक्षा, जीवन और भविष्य को लेकर खुलकर चर्चा की। उन्होंने साफ कहा कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता और अनुशासन के बिना जीवन अधूरा है। उन्होंने जीवन को बेहतर बनाने के लिए योजना बनाकर आगे बढ़ने की सलाह दी और कहा कि लक्ष्य हासिल करने के लिए कठिन परिश्रम ही एकमात्र रास्ता है।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में एक ऐसी बात कही जिसने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि असली खुशी बाहर नहीं, बल्कि इंसान के भीतर होती है। दूसरों से तुलना करने के बजाय अपने पास जो है, उसी में संतोष करना सीखना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने भी बेझिझक सवाल पूछे, जिनमें तनाव को सकारात्मक ऊर्जा में बदलने से लेकर सोशल मीडिया से दूरी बनाने जैसे मुद्दे शामिल थे। इसके अलावा उन्होंने कौशल विकास, देश-प्रदेश के विकास में योगदान और नारी सशक्तिकरण जैसे विषयों पर भी सवाल रखे।
महिलाओं की भूमिका पर बोलते हुए राज्यपाल ने नारी की तुलना पानी से की और कहा कि जैसे पानी के बिना जीवन संभव नहीं, वैसे ही नारी के बिना सृष्टि की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उनके इस उदाहरण ने कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों को गहराई से प्रभावित किया।
इस दौरान क्षेत्रीय विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने भी छात्राओं का मार्गदर्शन किया और उनके सवालों का जवाब दिया। कार्यक्रम के अंत में राज्यपाल ने छात्राओं को स्मृति चिन्ह प्रदान किए। इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. उषा अग्रवाल, प्राध्यापकगण, शदाणी दरबार के संत युधिष्ठिर लाल जी महाराज और बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।
यह मुलाकात केवल एक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि कई छात्राओं के लिए ऐसा अनुभव बन गई, जो उनके भविष्य की दिशा तय कर सकता है। अब सवाल यह है कि क्या ये सीखें सिर्फ इस मंच तक सीमित रहेंगी या सच में युवाओं के जीवन में कोई बड़ा बदलाव लाएंगी।
