छत्तीसगढ़

विधानसभा में गरजा ‘महिला आरक्षण’ का मुद्दा, सीएम का प्रस्ताव बना टकराव की चिंगारी, सदन में मचा घमासान

4 घंटे की चर्चा से पहले ही भड़का विवाद, विपक्ष ने लगाया महिलाओं को गुमराह करने का आरोप, सत्ता पक्ष ने पलटवार किया

रायपुर।
छत्तीसगढ़ विधानसभा के विशेष सत्र में गुरुवार को महिला आरक्षण का मुद्दा अचानक सियासी तूफान बन गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश करते ही सदन का माहौल गरमा गया और सत्ता पक्ष व विपक्ष आमने-सामने आ गए।

सीएम के प्रस्ताव से बढ़ा सियासी तापमान
मुख्यमंत्री साय ने महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए शासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश किया, जिसके लिए आसंदी ने 4 घंटे का समय निर्धारित किया। लेकिन इस प्रस्ताव के आते ही विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी और इसे लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

विपक्ष का पलटवार, प्रस्ताव पर उठे सवाल
नेता-प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने अशासकीय संकल्प प्रस्ताव पेश करने की कोशिश की, जिसे आसंदी ने स्वीकार नहीं किया। इस पर नाराजगी जताते हुए डॉ. महंत ने कहा कि मुख्यमंत्री पहले निंदा प्रस्ताव लाने की बात कर रहे थे, लेकिन अब जो प्रस्ताव लाया गया है, उसमें निंदा का कोई जिक्र नहीं है।

सदन में हंगामा, आरोप-प्रत्यारोप तेज
जैसे ही प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई, विपक्ष ने जोरदार हंगामा करते हुए सत्ता पक्ष पर महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि सरकार सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह गलत जानकारी फैलाकर महिलाओं को भ्रमित कर रही है।

सत्ता पक्ष का जवाब, विपक्ष पर ठीकरा
वहीं सत्ता पक्ष की ओर से विधायक लता उसेंडी ने पलटवार करते हुए कहा कि महिला आरक्षण के रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट खुद विपक्ष रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा में भी इस बिल को गिराने का काम विपक्ष ने किया और महिलाओं की भावनाओं की अनदेखी की।

गरमाई सियासत, नजरें चर्चा पर टिकीं
महिला आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर शुरू हुआ यह टकराव अब प्रदेश की सियासत को और गरमा सकता है। आने वाले घंटों में होने वाली चर्चा में यह देखना अहम होगा कि यह बहस समाधान की ओर बढ़ती है या फिर सियासी संघर्ष और तेज होता है।

 

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