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यूरोप में PM मोदी का बड़ा मिशन! 8 साल बाद स्वीडन पहुंचेंगे प्रधानमंत्री, AI से लेकर ईरान-अमेरिका तनाव तक होगी अहम बातचीत

नीदरलैंड के बाद अब स्वीडन पर भारत की नजर, टेक्नोलॉजी-ट्रेड और ग्लोबल संकट पर बन सकती है बड़ी रणनीति

Narendra Modi का यूरोप मिशन लगातार आगे बढ़ रहा है। नीदरलैंड दौरे के बाद अब प्रधानमंत्री मोदी स्वीडन की यात्रा पर निकल चुके हैं, जहां वे 8 साल बाद पहुंचने जा रहे हैं। इस दौरे को भारत और यूरोप के रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री 17 और 18 मई को Gothenburg में रहेंगे। यह दौरा Ulf Kristersson के निमंत्रण पर हो रहा है। माना जा रहा है कि इस यात्रा के दौरान व्यापार, निवेश, AI, नई टेक्नोलॉजी, रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु परिवर्तन जैसे कई बड़े मुद्दों पर रणनीतिक चर्चा हो सकती है।

यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पीएम मोदी आखिरी बार साल 2018 में पहले भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन के लिए स्वीडन गए थे। अब 8 साल बाद उनकी वापसी को यूरोप के साथ भारत के बढ़ते रिश्तों के बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी और स्वीडन के पीएम उल्फ क्रिस्टर्सन के बीच द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार और निवेश को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा सकती है। खासतौर पर AI और उभरती टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ाने पर जोर रहेगा। भारत स्वीडन की एडवांस टेक्नोलॉजी और इनोवेशन मॉडल में खास दिलचस्पी दिखा रहा है।

बताया जा रहा है कि दोनों नेता Ursula von der Leyen के साथ मिलकर यूरोपीय उद्योग गोलमेज सम्मेलन को भी संबोधित कर सकते हैं। यह यूरोप का एक बड़ा बिजनेस मंच माना जाता है।

इस दौरे में केवल व्यापार ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय तनाव भी बड़ा मुद्दा बन सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान-अमेरिका संघर्ष और उसके आर्थिक असर पर भी बातचीत होने की संभावना है। माना जा रहा है कि भारत यूरोप के साथ मिलकर वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर नई रणनीति तैयार करने की कोशिश कर सकता है।

भारत और स्वीडन के बीच बढ़ता व्यापार भी इस यात्रा की अहम वजह माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2025 में करीब 7.75 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। वहीं स्वीडन का भारत में निवेश भी लगातार बढ़ रहा है।

स्वीडन को यूरोप का टेक्नोलॉजी हब माना जाता है। प्रति व्यक्ति यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के मामले में यह देश यूरोप में सबसे आगे बताया जाता है। यही कारण है कि भारत अब स्वीडन के टेक और इनोवेशन मॉडल के साथ अपने संबंध और मजबूत करना चाहता है।

इस बीच भारत और European Union के बीच हुए बड़े मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA को भी इस दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है। इसे “Mother of All Trade Agreement” तक कहा जा रहा है, जो 2027 से लागू होने की संभावना है।

अब नजर इस बात पर टिकी है कि पीएम मोदी का यह स्वीडन दौरा भारत और यूरोप के रिश्तों को कितनी नई मजबूती देता है।

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