छत्तीसगढ़

कोरिया जिले को मिली बड़ी सौगात! 4.26 करोड़ की एनीकट योजना से बदलेगी किसानों की तस्वीर, 120 हेक्टेयर भूमि को मिलेगा फायदा

धुनहार नाला पर बनेगा अमरपुर एनीकट, सिंचाई से लेकर पेयजल और आवागमन तक कई समस्याओं का होगा समाधान

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरिया जिले के किसानों और ग्रामीणों को बड़ी सौगात देते हुए धुनहार नाला पर अमरपुर एनीकट निर्माण योजना के लिए 4 करोड़ 26 लाख 40 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने से क्षेत्र में सिंचाई, भू-जल संवर्धन, पेयजल उपलब्धता और आवागमन जैसी कई महत्वपूर्ण सुविधाओं को मजबूती मिलेगी।

जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत इस योजना को कोरिया जिले के विकासखंड बैकुंठपुर क्षेत्र में क्रियान्वित किया जाएगा। शासन का मानना है कि एनीकट निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों को खेती के लिए अतिरिक्त जल स्रोत उपलब्ध हो सकेंगे।

120 हेक्टेयर क्षेत्र को मिलेगा सिंचाई का लाभ

अमरपुर एनीकट के निर्माण के बाद क्षेत्र के किसान अपने स्वयं के संसाधनों के माध्यम से लगभग 120 हेक्टेयर खरीफ फसल क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्राप्त कर सकेंगे। इससे खेती की उत्पादकता बढ़ने के साथ-साथ किसानों की आय में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है।

भू-जल स्तर बढ़ाने में मिलेगी मदद

विशेषज्ञों के अनुसार एनीकट जैसी संरचनाएं वर्षा जल को रोकने और भू-जल पुनर्भरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। योजना के निर्माण से आसपास के क्षेत्रों में भू-जल स्तर सुधारने में मदद मिलेगी, जिसका लाभ लंबे समय तक ग्रामीणों और किसानों को मिलेगा।

पेयजल और आवागमन की सुविधा भी होगी मजबूत

यह परियोजना केवल सिंचाई तक सीमित नहीं है। एनीकट बनने से ग्रामीणों को निस्तारी और पेयजल की बेहतर सुविधा मिलेगी। साथ ही क्षेत्र में आवागमन भी सुगम होगा, जिससे गांवों के बीच संपर्क और मजबूत होने की संभावना है।

मुख्य अभियंता को मिली जिम्मेदारी

योजना के निर्माण कार्य के लिए जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, हसदेव गंगा कछार, अंबिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। विभागीय अधिकारियों को निर्माण कार्य समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

सरकार की इस स्वीकृति को क्षेत्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय किसानों को उम्मीद है कि योजना के पूरा होने के बाद खेती और जल उपलब्धता से जुड़ी कई वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान हो सकेगा।

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