रायपुर में जशपुर का जलवा! मुख्यमंत्री भी रुके इस स्टॉल पर, हस्तशिल्प और वनोपज उत्पादों ने सबका दिल जीता
विश्व पर्यावरण दिवस पर ‘जशक्राफ्ट’ और ‘आरोग्य अमृत अवलेह’ बने आकर्षण का केंद्र, महिला समूहों की मेहनत को मिली बड़ी पहचान

रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस पर राजधानी रायपुर में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में जशपुर वनमंडल की अनूठी पहल ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। स्थानीय वनोपज और पारंपरिक हस्तशिल्प से तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी न केवल आकर्षण का केंद्र बनी, बल्कि मुख्यमंत्री से लेकर पर्यावरण प्रेमियों तक सभी ने इसकी खुलकर सराहना की।
राजीव स्मृति वन स्थित कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए जशपुर वनमंडल के स्टॉल में महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए ‘आरोग्य अमृत अवलेह’ और ‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड के उत्पादों ने लोगों को खासा प्रभावित किया। स्थानीय संसाधनों से निर्मित इन उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और उपयोगिता ने प्रदर्शनी को विशेष पहचान दिलाई।
प्रदर्शनी का अवलोकन करने पहुंचे विष्णुदेव साय, केदार कश्यप, रामसेवक पैंकरा सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने उत्पादों की गुणवत्ता की सराहना की। उन्होंने महिला समूहों द्वारा किए जा रहे कार्यों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंदघास और बांस से निर्मित हस्तशिल्प उत्पादों ने सबसे अधिक लोगों का ध्यान आकर्षित किया। स्टॉल में प्रदर्शित झुमके, मालाएं, सजावटी वस्तुएं और अन्य कलात्मक उत्पाद पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय कला और संस्कृति की खूबसूरत झलक पेश कर रहे थे। बड़ी संख्या में आगंतुकों ने इन उत्पादों की खरीदारी में भी रुचि दिखाई और महिला समूहों के कौशल की प्रशंसा की।
वहीं आयुर्वेदिक और वनोपज आधारित स्वास्थ्यवर्धक उत्पाद ‘आरोग्य अमृत अवलेह’ भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण रहा। आगंतुकों ने इसके औषधीय गुणों, निर्माण प्रक्रिया और स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी प्राप्त की। कई लोगों ने इसे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक आवश्यकता का बेहतरीन संगम बताया।
जशपुर वनमंडल की यह पहल केवल उत्पाद प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वनाधारित आजीविका को मजबूत करने और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए जा रहे ये उत्पाद ग्रामीण और वनाश्रित परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक कला, स्थानीय ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे उत्पादों को व्यापक बाजार और ब्रांडिंग का समर्थन मिले तो जशपुर जैसे वन क्षेत्रों में हजारों महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित इस प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय संसाधनों का सतत उपयोग और महिला सशक्तिकरण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। जशपुर के महिला समूहों की यह सफलता अब प्रदेश के अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बनती नजर आ रही है।

