छत्तीसगढ़

नौकरी का झांसा, फिर बनाया बंधुआ मजदूर! मानव तस्कर को कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा

दो नाबालिग बालिकाओं को ऊंची तनख्वाह का लालच देकर कर्नाटक ले गया था आरोपी, महीनों तक कराया काम और नहीं दिया मेहनताना।

 

अंबिकापुर। मानव तस्करी के एक गंभीर मामले में अंबिकापुर की विशेष न्यायाधीश (एनआईए) अदालत ने दोषी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है, तो उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

मामले के अनुसार, जशपुर जिले के कांसाबेल थाना क्षेत्र के ग्राम टांगरगांव (कृष्णानगर) निवासी मनीराम (30) ने 6 अक्टूबर 2024 को बागबहार थाना क्षेत्र की दो नाबालिग बालिकाओं को बेहतर नौकरी और 12 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर कर्नाटक ले गया था।

कर्नाटक पहुंचने के बाद दोनों बालिकाओं को एक व्यापारी के गन्ने के खेत में काम पर लगा दिया गया। उन्हें झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर किया गया और वादा किए गए वेतन का एक भी रुपया नहीं दिया गया। जब बालिकाओं ने घर लौटने की इच्छा जताई, तो उनके साथ मारपीट की गई। उन्हें यह कहकर रोका जाता था कि उन्हें लाने के बदले की रकम आरोपी पहले ही ले चुका है।

उधर, बालिकाओं के लापता होने पर परिजनों ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान पुलिस को आरोपी की संलिप्तता के प्रमाण मिले, जिसके बाद उसे हिरासत में लिया गया। आरोपी की निशानदेही पर करीब चार महीने बाद दोनों बालिकाओं को कर्नाटक से सकुशल बरामद किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विशेष न्यायाधीश (एनआईए) शक्ति सिंह राजपूत की अदालत ने आरोपी मनीराम को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(3) के तहत दोषी ठहराया और 10 वर्ष के कारावास के साथ 5 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।

यह फैसला मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त न्यायिक कार्रवाई का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

R.O. No. : 13910/ 226

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