दंतेवाड़ा के एक आदेश से मचा बवाल! 2 लाख कर्मचारियों में नाराजगी, अब सीधे CM साय से लगाई गुहार
संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने आदेश पर जताई आपत्ति, अधिकारियों पर कार्रवाई और आदेश निरस्त करने की उठाई मांग

रायपुर। दंतेवाड़ा कलेक्ट्रेट की आदिवासी विकास शाखा से जारी एक आदेश को लेकर प्रदेश में नया विवाद खड़ा हो गया है। संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि इस आदेश में उन्हें सम्मान के दायरे से बाहर दर्शाया गया है, जिससे कर्मचारियों की भावनाएं आहत हुई हैं। मामले को लेकर कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से हस्तक्षेप की मांग करते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और आदेश को तत्काल निरस्त करने की अपील की है।
छत्तीसगढ़ संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश प्रवक्ता पुरन दास ने कहा कि प्रदेश में दो लाख से अधिक संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अन्य अनियमित कर्मचारी विभिन्न शासकीय विभागों में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ड्राइवर से लेकर मंत्रालय तक, मुख्यमंत्री निवास, मंत्रियों के कार्यालयों, आईएएस अधिकारियों के शासकीय आवासों और विभिन्न सरकारी कार्यालयों में यही कर्मचारी दिन-रात कार्य कर सरकार की योजनाओं को धरातल पर पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
‘सम्मान न दें, लेकिन अपमान भी न करें’
कर्मचारी संघ का कहना है कि यदि सरकार सभी कर्मचारियों को विशेष सम्मान नहीं दे सकती, तो कम से कम ऐसा कोई सार्वजनिक आदेश भी जारी नहीं होना चाहिए, जिससे संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को सम्मान के दायरे से बाहर दिखाया जाए। उनका आरोप है कि ऐसा आदेश वर्षों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के समर्पण और योगदान का उपहास करने जैसा है।
अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
संघ ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस तरह की मानसिकता रखने वाले अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और संबंधित आदेश को तत्काल वापस लिया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अन्य सभी कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक एवं गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाए।
सरकार से पुनर्विचार की उम्मीद
कर्मचारी संगठन ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और राज्य के विकास में योगदान देने वाले प्रत्येक कर्मचारी के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए उचित निर्णय करेगी।
नोट: यह समाचार संविदा कर्मचारी संघ द्वारा लगाए गए आरोपों और उनकी मांगों पर आधारित है। संबंधित आदेश या आरोपों पर जिला प्रशासन अथवा आदिवासी विकास शाखा की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई है।
