CGPSC भर्ती घोटाले में बड़ा मोड़! सुप्रीम कोर्ट ने दो आरोपियों को दी राहत, जानिए कोर्ट ने क्यों दिया जमानत का आदेश
छत्तीसगढ़ PSC भर्ती मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को सुप्रीम कोर्ट से मिली नियमित जमानत; एक साल से अधिक समय से थे न्यायिक हिरासत में

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट से दो आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने मामले में गिरफ्तार तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और पूर्व उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। दोनों लंबे समय से न्यायिक हिरासत में थे। कोर्ट के इस आदेश के बाद बहुचर्चित CGPSC भर्ती मामले में एक अहम मोड़ आ गया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने की। आरती वासनिक की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. मुरेश के साथ अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि आरती वासनिक एक वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में हैं। मामले में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। वहीं मुकदमे के दौरान 100 से अधिक गवाहों का परीक्षण किया जाना है, जिससे सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लग सकता है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि मुकदमे में हो रही देरी अभियुक्तों की वजह से नहीं, बल्कि अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने के कारण हो रही है।
CBI की भूमिका पर भी उठाई गई दलील
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बचाव पक्ष ने दावा किया कि CBI की ओर से आरती वासनिक की किसी प्रत्यक्ष भूमिका का आरोप नहीं लगाया गया है। इसके अलावा अदालत को यह भी बताया गया कि मामले में कथित तौर पर लाभान्वित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां फिलहाल स्थगित हैं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरती वासनिक और ललित गनवीर को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।
क्या है CGPSC भर्ती घोटाला?
CGPSC घोटाला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में वर्ष 2020 से 2022 के बीच हुई कथित अनियमितताओं से जुड़ा मामला है। आरोप है कि इस दौरान आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कारों में योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी कर प्रभावशाली राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों से जुड़े लोगों को डिप्टी कलेक्टर, DSP समेत अन्य महत्वपूर्ण पदों पर चयनित किया गया।
इन आरोपों के सामने आने के बाद प्रदेश की भर्ती प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे थे।
CBI को सौंपी गई थी जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई। जांच के दौरान CBI ने कई स्थानों पर छापेमारी की और कथित तौर पर महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए।
जांच एजेंसी ने इस मामले में पूर्व CGPSC अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया था।
फिलहाल CGPSC भर्ती घोटाला मामला न्यायिक प्रक्रिया में है। सुप्रीम कोर्ट से दो आरोपियों को मिली जमानत को इसी मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।


