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BREAKING: जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी को गैंगस्टर मामले में दोषी करार दिया है। कोर्ट ने मुख्तार अंसारी को 10 साल कैद और 5 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इसी मामले में अभियुक्त मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी पर थोड़ी देर में फैसला आएगा। 

Mukhtar Ansari News: गाजीपुर (Ghazipur) की MP MLA कोर्ट ने जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी (Mukhtar Ansari) को गैंगस्टर मामले (Gangster Case) में दोषी करार दिया है। इसके साथ ही अदालत ने हत्या और अपहरण के मामले में अंसारी को 10 साल कैद और 5 लाख रुपए जुर्माना की सजा सुनाई है। मुख्तार अंसारी, उनके बड़े भाई और BSP सांसद अफजाल अंसारी (Afzal Ansari) के खिलाफ अपहरण और हत्या के मामले में फैसला सुनाए जाने से पहले जिला में सुरक्षा बढ़ा दी गई थीं।

बता दें कि अपर सत्र न्यायाधीश दुर्गेश कुमार की अदालत में एक अप्रैल को बहस पूरी हो गई थी। इसके बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। पहले इस मामले में 15 अप्रैल को फैसला आना था, लेकिन बाद में इसके लिए आज की तारीख निर्धारित की गई थी। अगर कोर्ट मामले में अफजाल को दो साल से अधिक की सजा सुनाती है तो उनकी सांसदी जा सकती है। बता दें कि मुख्तार पहले से ही जेल में बंद है।

वहीं, मुख्तार अंसारी की बात करें, तो गाजीपुर में वर्ष 2005 में मुहम्मदाबाद थाना के बसनिया चट्टी में भाजपा के तत्कालीन विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों को हत्या कर दी गई थी। इसी मामले में माफिया मुख्तार अंसारी और उसके भाई आफजाल अंसारी पर गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। फिलहाल, इस मामले में आफजाल अंसारी जमानत पर है। खैर, देर ही सही, लेकिन मुख्तार के गुनाहों का हिसाब हो ही गया। आइइए, आगे कि रिपोर्ट में जानते हैं कि आखिर मुख्तार अंसारी कौन है?

कौन है मुख्तार अंसारी?

1980 के दशक में देश तेजी से बदल रहा था। नई-नई फैक्ट्रियां लगाई जा रही थी। बड़े-बड़े सरकारी ठेके बंट रहे थे। यूपी सरकार पूर्वांचल के विकास को लेकर कई प्रोजेक्ट्स मंजूर किए। इसी प्रोजेक्ट्स के ठेका लेने को लेकर पूर्वांचल की धरती ‘लाल’ होने लगी। मुख्तार अंसारी इसी की उपज थे। मुख्तार अंसारी मखुनी सिंह के गैंग से मिल गए। साल 1980 में इस गैंग की साहिब सिंह के गैंग से गाजीपुर के सैदपुर में एक प्लॉट को लेकर बवाल हुआ।

साहिब सिंह के गैंग में वाराणसी का बृजेश सिंह शामिल था। बृजेश सिंह का मुख्तार अंसारी से 36 का आंकड़ा था। साल 1990 में ब्रजेश सिंह ने अपना गैंग बना लिया। गाजीपुर के सभी ठेके उसने अपने कंट्रोल में ले लिए। कोयला, रेलवे कंस्ट्रक्शन, माइनिंग, शराब और पब्लिक वर्क जैसे 100 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट के काम को लेकर मुख्तार अंसारी और ब्रजेश सिंह गैंग के बीच कई बार खूनी खेल हुआ।

1987 में सच्चिदानंद राय की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी पूर्वांचल का बड़ा नाम बन चुके थे। सच्चिदानंद राय की हत्या के बाद मुख्तार अंसारी का राजनीति में रसूख बढ़ने लगा। 1988 में तिवारीपुर के राम नारायण राय की हत्या में भी मुख्तार अंसारी को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। हिरासत में बंद कुख्यात सुभस सिंह की हत्या में मुख्तार अंसारी का नाम आया। उसके बाद अपराध जगत में वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर और मऊ में उसका डंका बजने लगा।

मुख्तार अंसारी के नाम से ही लोग कांपते थे। कहा तो यहां तक जाता है कि, मुख्तार के लिए गाजीपुर जेल में सुख सुविधा की तमाम व्यवस्था की गई थी। मछली मारने के लिए तालाब बनाया गया। तत्कालीन डीएम जेल में उसके साथ बैडमिंटन खेलते थे। जेल के बाहर मुख्तार के लोगों के लिए कमरे बनाए गए थे। 2019 में पंजाब जेल से मुख्तार को यूपी के बांदा जेल लाया गया। गैंगस्टर एक्ट के तहत मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, गाजीपुर सहित अलग-अलग शहरों में उसकी करोड़ों की संपत्ति जब्त की गई। गजल होटल सहित कई अन्य मकान पर बुलडोजर चलाया गया।

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