छत्तीसगढ़

मोहला-मानपुर: कैसे कटेगी 4 बेबसों की जिंदगी ? कानून के रखवाले को हत्यारों ने उतारा मौत के घाट, मासूमों के सिर से उठा बाप का साया, 2 बेटे और 2 बेटियों का कोई नहीं सहारा

मोहला-मानपुर। बीते 21 मई को घोटियाकन्हार गांव निवासी एक पूर्व सहायक आरक्षक बिरझु दुग्गा के हत्यारे ग्राम पटेल समेत 7 ग्रामीणों को पुलिस ने सलाखों के पीछे दाखिल किया है. हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में अहम कड़ी साबित हुए मृतक के बच्चे, जिन्होंने हौंसला और साहस दिखाते हए अपने पिता के हत्यारों को सजा दिलाने की जंग तो जीत ली, लेकिन मां से अलग अपने पिता के साथ जिंदगी जी रहे मृतक बिरझु के मासूम बच्चों का भविष्य खतरे में है, अब इनका कोई नहीं है, बेबसों का क्या होगा ?

मोहला-मानपुर जिला कलेक्टर एस. जयवर्धन ने कहा कि प्रशासनिक मुखिया को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा. बच्चों की परवरिश, विशेषकर उनकी शिक्षा को लेकर जरूरी विचार -विमर्श किया. कलेक्टर जयवर्धन ने मसले में संवेदनशीलला और गंभीरता दिखाते हुए बच्चों के उज्वल भविष्य के लिए व्यवस्था सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है.

आईसीडीएस और अन्य संबंधित लोगों से करेंगे चर्चा

कलेक्टर जयवर्धन ने इस दरमियान कहा कि असीसीडीएस यानी महिला एवं बाल विकास विभाग समेत अन्य संबंधित विभागों से वे इस मसले पर बात करेंगे. तदुपरांत बच्चों को उचित तौर पर व्यवस्थित किया जाएगा. कलेक्टर ने आश्वस्त किया है कि प्रसासन बच्चों के बेहतर जीवन के लिए जरूर कुछ करेगा.

औंधी में हैं शरणागत ?

बच्चों के वर्तमान ठिकाने के संबंध में जानकारी मिली है कि बच्चे अपने गांव घोटियाकन्हार में नहीं, बल्कि औंधी मुख्यालय में अपने किसी परिचित के घर शरणागत हैं. बता दें कि मृतक बिरझु के चार बच्चे हैं, जिनमें दो बेटे और दो बेटियां हैं.

बता दें कि सबसे बड़ी बेटी है. हालांकि काफी छोटे उम्र के हैं. मां से अलग रह रहे ये बच्चे एक मात्र पिता मृतक बिरझु के सहारे जी रहे थे. पिता की मौत के बाद जो सहारा बनते वो रिश्तेदार ही उन्हें बेसहारा करने वाले निकले.

गांव में सुरक्षित रह पाएंगे मासूम ?

इन तमाम घटनाक्रमो के बीच एक सवाल ये भी बड़ा सामने आता है कि पिता की हत्या के बाद बेसहारा हो चुके ये मासूम क्या उस गांव में सुरक्षित रह पाएंगे. जहां के मुखिया समेत अन्य ग्रामीणों को उनके पिता की हत्या के आरोप में जेल भेजा गया हो. वैसे भी धुर नक्सल प्रभावित बीहड़ गांव में चार मासूमों का बिना किसी पारिवारिक सहारे के रह पाना दहशतजदा और मुश्किलों भरा ही लगता है.

सत्ता पक्ष से भी है उम्मीद

चार मासूमों की जिंदगी से ताल्लुख रखने वाले इस गंभीर मसले पर सत्तापक्ष से भी उम्मीदें हैं. कांग्रेस की सरकार है, कांग्रेस के विधायक हैं, जो संसदीय सचिव भी हैं. इलाके में कांग्रेस जन प्रतिनिधियों की बहुलता भी है. ऐसे में ये उम्मीद लाज़मी है कि सत्ता पक्ष इन मासूमों के उज्वल भविष्य की न केवल पैरवी करेगा, बल्कि सत्ता का साथ भी प्रशासन को मुहैया कराएगा.

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