“जंगल में मौत का खेल बेनकाब! बाघ-तेंदुए की खाल के साथ पकड़ा गया खतरनाक शिकार गिरोह”
दंतेवाड़ा के घने जंगलों में चल रहा था खूनी कारोबार—संयुक्त टीम की घेराबंदी में 6 शिकारी गिरफ्तार

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा के जंगलों में चल रहे खौफनाक शिकार रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है। वन विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए बाघ और तेंदुए की खाल के साथ सक्रिय शिकार गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है।
इस कार्रवाई में 6 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो लंबे समय से जंगलों में संरक्षित वन्यजीवों का शिकार कर अवैध कारोबार चला रहे थे।
यह पूरी कार्रवाई 16-17 मार्च 2026 को मुखबिर की सूचना पर की गई, जिसमें वनमंडल दंतेवाड़ा, वनमंडल बीजापुर, इंद्रावती टाइगर रिजर्व, राज्य स्तरीय उड़नदस्ता दल और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की संयुक्त टीम शामिल थी।
टीम ने दंतेवाड़ा-बालूद मार्ग पर घेराबंदी कर दो आरोपियों को बाघ की खाल के साथ रंगे हाथों पकड़ा। पूछताछ में पूरे गिरोह का खुलासा हुआ, जिसके बाद अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में लक्ष्मण तेलाम, देवीराम ओयाम, रमेश कुड़ियाम, फरसोन पोयामी, सेमला रमेश और सुखराम पोडियाम समेत अन्य शामिल हैं। इनके निशानदेही पर ग्राम केशापुर में दबिश दी गई, जहां से तेंदुए की खाल भी बरामद हुई। इस दौरान मासो ओयाम और अर्जुन भोगामी को भी गिरफ्तार किया गया।
वन विभाग के अनुसार, जब्त बाघ और तेंदुआ अनुसूची-1 के अंतर्गत आने वाले अत्यंत संरक्षित वन्यजीव हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

