
दुर्ग। दुर्ग जिले में चोरी के एक सनसनीखेज मामले का पुलिस ने खुलासा किया है। जिस महिला को घर के काम में मदद के लिए कुछ दिनों के लिए रखा गया था, उसी पर लाखों रुपये के गहने चोरी करने का आरोप साबित हुआ है। पुलिस ने नौकरानी, उसके पति और जीजा को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 12 लाख 22 हजार रुपये मूल्य का सामान बरामद किया है।
यह मामला नेवई थाना क्षेत्र का है, जहां आशीष नगर रिसाली निवासी दुर्गा प्रसाद नागपुरे ने घर में बढ़े कामकाज के कारण मालती ध्रुव नामक महिला को दो दिनों के लिए काम पर रखा था। लेकिन कुछ दिनों बाद जब उन्होंने घर की अलमारी खोली तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
अलमारी खुली तो गायब थे लाखों के जेवर
दुर्गा प्रसाद नागपुरे ने 27 मई को नेवई थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई कि उनकी अलमारी में रखे सोने-चांदी के कई कीमती आभूषण गायब हैं। चोरी हुए सामान में सोने का हार, मांगटीका, नथ, मंगलसूत्र, कड़े और कान के टॉप्स सहित कई कीमती जेवर शामिल थे।
शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और घर में काम करने वाली महिला पर संदेह होने पर उससे पूछताछ की गई।
पूछताछ में खुल गया पूरा खेल
जांच के दौरान पुलिस ने मालती ध्रुव, उसके पति देवीलाल ध्रुव और जीजा हेमलाल मंडावी को थाने बुलाकर पूछताछ की। शुरुआत में तीनों ने खुद को बेगुनाह बताया, लेकिन पुलिस की सख्ती के आगे ज्यादा देर तक टिक नहीं सके और आखिरकार अपना जुर्म कबूल कर लिया।
आरोपी मालती ध्रुव ने बताया कि उसने घर में काम करने के दौरान अलमारी में रखे गहनों पर नजर रखी और मौका मिलते ही उन्हें चुरा लिया। बाद में पति और जीजा की मदद से चोरी किए गए कुछ गहनों को गिरवी रखकर लोन भी लिया गया।
गिरवी रखे गहने, नकदी और स्कूटी बरामद
पुलिस जांच में पता चला कि चोरी के जेवरों को गिरवी रखकर प्राप्त रकम का इस्तेमाल भी किया गया था। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने गिरवी रखने की रसीद, मोबाइल फोन, एक लाख रुपये नकद, एक स्कूटी और तीन मोबाइल फोन समेत कुल 12 लाख 22 हजार रुपये का सामान बरामद किया है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई से खुला मामला
नेवई पुलिस की सतर्कता और त्वरित जांच के चलते चोरी का यह मामला कुछ ही दिनों में सुलझ गया। तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर बताता है कि घर में काम करने वाले लोगों को रखने से पहले पूरी जांच-पड़ताल और सत्यापन कितना जरूरी है। कुछ दिनों का भरोसा कभी-कभी लाखों रुपये की कीमत भी वसूल सकता है।

