छत्तीसगढ़

पुलिस कस्टडी में मौत का मामला फिर गरमाया! सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बिलासपुर पहुंची CBI, अब खुलेगा पूरा राज

चार सदस्यीय टीम ने थाने से केस डायरी और जांच दस्तावेज लिए, सेंट्रल जेल पहुंचकर अधिकारियों से भी की पूछताछ

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में पुलिस हिरासत के बाद युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में अब CBI की एंट्री हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI की चार सदस्यीय विशेष टीम शुक्रवार को बिलासपुर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी।

टीम ने सिविल लाइन थाने पहुंचकर केस डायरी समेत घटना से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड हासिल किए। इसके बाद टीम सेंट्रल जेल भी पहुंची, जहां जेल अधीक्षक और अन्य कर्मचारियों से घटना से संबंधित जानकारी ली गई।

मामला ग्राम मोहरा निवासी श्रवण तांबे (35) की मौत से जुड़ा है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस हिरासत के दौरान उसके साथ मारपीट की गई थी। वहीं, न्यायिक जांच में भी उसके सिर में गंभीर चोट और उससे उत्पन्न जटिलताओं को मौत का कारण बताया गया था।

36 घंटे हिरासत के बाद आबकारी केस में भेजा गया था जेल

जानकारी के मुताबिक श्रवण तांबे को पुलिस ने 17 जनवरी 2024 को पकड़ा था। अगले दिन पुलिस ने उसके पास से 6 लीटर महुआ शराब बरामद होने का दावा करते हुए आबकारी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।

इसके बाद 19 जनवरी को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। अगले दिन जब परिजन उससे मिलने सेंट्रल जेल पहुंचे तो उन्हें मुलाकात नहीं करने दी गई।

जेल पहुंचने के तीन दिन बाद बिगड़ी तबीयत

21 जनवरी को जेल में अचानक श्रवण की तबीयत बिगड़ गई। पहले उसका इलाज जेल अस्पताल में किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे सिम्स अस्पताल रेफर किया गया।

सिम्स पहुंचने के बाद देर रात 22 जनवरी को उसकी मौत हो गई। जेल प्रबंधन के अनुसार उसे सांस लेने में परेशानी होने के बाद अस्पताल भेजा गया था।

न्यायिक जांच में सिर की चोट को बताया गया मौत का कारण

मामले की न्यायिक जांच प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट निकसन डेविड लकड़ा ने की थी। 22 जुलाई 2024 को पेश की गई जांच रिपोर्ट में पोस्टमार्टम, FSL, हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मौत का कारण सिर में लगी गंभीर चोट और उससे उत्पन्न जटिलताएं बताया गया था।

जांच के दौरान मृतक के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए थे।

परिजनों ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उठाई आवाज

श्रवण की पत्नी लहरा बाई और बेटी ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और हिरासत में मौत के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था।

अक्टूबर 2024 में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 1 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था और पुलिसकर्मियों की लापरवाही को भी जिम्मेदार माना था।

इसके बाद परिजनों ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- जांच रिपोर्ट के बाद FIR क्यों नहीं?

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने सवाल उठाया कि न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई।

DGP की ओर से बताया गया कि जांच रिपोर्ट उन्हें आधिकारिक रूप से प्राप्त नहीं हुई थी। इसके बाद करीब तीन साल बाद 30 जुलाई को सिविल लाइन थाने में हत्या का केस दर्ज किया गया।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए CBI को जांच सौंपने का आदेश दिया।

CBI जांच में इन बिंदुओं पर रहेगा फोकस

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI अब सिर्फ श्रवण की मौत की परिस्थितियों की ही जांच नहीं करेगी, बल्कि उन पुलिस अधिकारियों की भूमिका भी खंगालेगी, जिन्होंने न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कथित तौर पर उचित कार्रवाई नहीं की।

CBI टीम केस डायरी, मजिस्ट्रियल/न्यायिक जांच के दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच करेगी। साथ ही पुलिस हिरासत के दौरान घटनाक्रम और जेल पहुंचने के बाद श्रवण की तबीयत बिगड़ने से लेकर मौत तक की पूरी कड़ी को जोड़ा जाएगा।

13 अक्टूबर से पहले देनी है जांच रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने CBI को निर्देश दिया है कि 13 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की जाए।

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को मृतक के परिजनों को 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। अंतिम मुआवजे की राशि बाद में तय की जाएगी।

अब CBI की जांच से यह सामने आने की उम्मीद है कि श्रवण तांबे को लगी सिर की गंभीर चोट कैसे हुई, हिरासत के दौरान वास्तव में क्या हुआ और न्यायिक जांच के बाद कार्रवाई में देरी क्यों हुई।

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