“अयोध्या में गूंजा दिव्य रहस्य! ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना के पीछे क्या है अद्भुत शक्ति का राज?”
राष्ट्रपति मुर्मू की मौजूदगी में हुआ ऐतिहासिक अनुष्ठान, जानिए क्यों कहा जा रहा इसे ऊर्जा का केंद्र

आज हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर अयोध्या एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण पल का साक्षी बना। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की दूसरी मंजिल पर पूर्ण विधि-विधान के साथ ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना की, जिसे लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है।
राष्ट्रपति मुर्मू सुबह करीब 11 बजे महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुंचीं, जहां से कड़ी सुरक्षा के बीच वे मंदिर परिसर पहुंचीं। आद्य शंकराचार्य द्वार से प्रवेश कर उन्होंने सबसे पहले रामलला के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। इस दौरान पूरी अयोध्या नगरी केसरिया झंडों और भव्य सजावट से सजी नजर आई।
🔍 क्या है ‘श्रीराम यंत्र’ की खासियत?
मंदिर की दूसरी मंजिल पर स्थापित ‘श्रीराम यंत्र’ कोई साधारण धार्मिक संरचना नहीं है। यह प्राचीन वैदिक गणित और जटिल ज्यामितीय सिद्धांतों पर आधारित है। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार, इस यंत्र को दो साल पहले भव्य शोभायात्रा के साथ अयोध्या लाया गया था।
आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह यंत्र दिव्य ऊर्जा का केंद्र माना जाता है, जो पूरे मंदिर परिसर में सकारात्मक स्पंदन और आध्यात्मिक शक्ति का संचार करता है। यही कारण है कि इसकी स्थापना को एक अत्यंत शुभ और रहस्यमयी घटना के रूप में देखा जा रहा है।
इस भव्य आयोजन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी मौजूद रहे।
🛡️ कड़ी सुरक्षा, लेकिन श्रद्धालुओं का भी ध्यान
अयोध्या के जिलाधिकारी निखिल टिकाराम फुंडे के अनुसार, राष्ट्रपति के दौरे को लेकर व्यापक तैयारियां की गई थीं। हालांकि 19 मार्च को VIP दर्शन बंद रखे गए, लेकिन आम श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया। वहीं SSP गौरव ग्रोवर ने बताया कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
🙏 विद्वानों का जमावड़ा, श्रमिकों को सम्मान
इस अनुष्ठान को संपन्न कराने के लिए देशभर से 51 प्रख्यात वैदिक विद्वान एकत्र हुए, जिनका नेतृत्व पुजारी गणेश्वर शास्त्री ने किया। इसके साथ ही राष्ट्रपति मुर्मू ने उन 400 से अधिक श्रमिकों को भी सम्मानित किया, जिन्होंने इस भव्य मंदिर के निर्माण में अपना अहम योगदान दिया।



