संसद में टूटा बड़ा लोकतांत्रिक नियम! PM मोदी के जवाब के बिना ही पास हो गया राष्ट्रपति का धन्यवाद प्रस्ताव, 21 साल बाद दोहराया गया 2004 का इतिहास

नई दिल्ली।
संसद के बजट सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में एक ऐसी असाधारण और चौंकाने वाली स्थिति देखने को मिली, जिसने संसदीय परंपराओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। साल 2004 के बाद पहली बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही लोकसभा में पारित कर दिया गया।
लगातार हंगामे, नारेबाजी और विपक्ष के तीखे विरोध के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने प्रस्ताव को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। यह दृश्य कई सांसदों और राजनीतिक विश्लेषकों के लिए हैरान करने वाला रहा।
⚠️ हंगामे ने रोका पीएम मोदी का जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देना था। लेकिन विपक्षी सांसदों की लगातार नारेबाजी और व्यवधान के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। हालात बेकाबू होते देख स्पीकर को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी और पीएम मोदी का जवाब नहीं हो सका।
🔊 शोर-शराबे के बीच पारित हुआ प्रस्ताव
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 28 जनवरी को संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति द्वारा दिए गए अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव पढ़कर सुनाया। विपक्ष के तीव्र विरोध और हंगामे के बीच ही इसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया, जिससे सदन में राजनीतिक तनाव और गहरा गया।
⛔ विपक्ष का विरोध जारी, सदन बार-बार स्थगित
विरोध थमने के कोई संकेत नहीं मिलने पर स्पीकर ने गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इससे पहले सुबह 11 बजे शुरू हुई कार्यवाही भी कुछ ही देर में रोकनी पड़ी। विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक परंपराओं को कुचलने का आरोप लगाता रहा।
🗣️ राहुल गांधी को बोलने न देने पर बवाल
विपक्षी सांसदों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का मौका न मिलने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने राहुल गांधी को सदन में बोलने से रोका और उन्हें 2020 के चीन सीमा विवाद से जुड़े पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण का हवाला देने से भी रोक दिया गया।
🚫 आठ कांग्रेस सांसद निलंबित
सरकार और विपक्ष के बीच टकराव मंगलवार को और तेज हो गया, जब अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप में कांग्रेस के आठ सांसदों को बजट सत्र के शेष हिस्से के लिए निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद सदन का माहौल और अधिक विस्फोटक हो गया।
📜 2004 में भी ऐसा ही हुआ था…
इतिहास गवाह है कि ऐसा दृश्य पहले भी देखा जा चुका है। साल 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने से रोका गया था। उस समय बीजेपी विपक्ष में थी।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया है, जिसमें मनमोहन सिंह 10 मार्च 2005 को दिए गए भाषण में 10 जून 2004 की उस घटना का जिक्र करते हैं, जब उन्हें भी जवाब देने का मौका नहीं मिला था।

