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दिल से चिपका ‘मौत का ट्यूमर’… 11 साल के बच्चे पर मंडरा रहा था खतरा, फिर 4 घंटे में डॉक्टरों ने किया ऐसा चमत्कार कि सब रह गए दंग!

छह महीने तक सीने में छिपा रहा खौफनाक राज, ऑपरेशन टेबल पर हर पल मौत का डर… लेकिन आखिरकार मिली नई जिंदगी

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी से एक ऐसी हैरान कर देने वाली मेडिकल कहानी सामने आई है, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक 11 साल के मासूम के दिल से ऐसा खतरनाक और दुर्लभ कैंसर निकाला गया, जिसे मेडिकल दुनिया में लगभग नामुमकिन माना जाता है।

पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़े डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने यह असंभव कर दिखाया। डॉक्टरों की टीम ने बच्चे के हृदय से चिपके स्टेज-3 इनवेसिव थायमिक कैंसर को सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दे दी।


💀 दिल, फेफड़े और नसों से चिपका था ‘मौत का जाल’

डॉक्टरों के मुताबिक यह ट्यूमर इतना खतरनाक था कि यह सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि पेरिकार्डियम, फ्रेनिक नर्व, एओर्टा, पल्मोनरी आर्टरी और फेफड़े तक फैल चुका था। आमतौर पर ऐसा कैंसर 40-60 साल के लोगों में पाया जाता है, लेकिन 11 साल के बच्चे में इसका मिलना बेहद दुर्लभ और खतरनाक संकेत था।

सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि मेडिकल इतिहास में इससे कम उम्र में ऐसा केस लगभग नहीं मिला।


⚠️ कई अस्पतालों ने खड़े कर दिए हाथ, कहा- ‘ऑपरेशन नामुमकिन’

करीब 6 महीने से बच्चा सीने में दर्द, भारीपन और सांस फूलने की समस्या से जूझ रहा था। जब जांच हुई तो सच्चाई सामने आई—दिल से चिपका विशाल ट्यूमर।

प्रदेश के कई अस्पतालों ने इस केस को बेहद जोखिम भरा बताकर ऑपरेशन से साफ इनकार कर दिया। हर तरफ निराशा थी… हर पल डर था कि कहीं कुछ अनहोनी न हो जाए।


🔪 4 घंटे तक चली जंग… ऑपरेशन थिएटर बना रणभूमि

आखिरकार अम्बेडकर अस्पताल के डॉ. कृष्णकांत साहू और उनकी टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया।

ड्यूल एप्रोच तकनीक के जरिए छाती और पसलियों दोनों जगह से चीरा लगाकर ऑपरेशन शुरू हुआ। करीब 4 घंटे तक चली इस सर्जरी में:

  • 12×8 सेंटीमीटर का विशाल ट्यूमर निकाला गया

  • करीब 400 ग्राम वजनी ‘मौत का गुच्छा’ शरीर से बाहर निकाला गया

  • फेफड़े में फैले 3 अन्य ट्यूमर भी हटाए गए

  • दिल के हिस्से को रिपेयर करना पड़ा

  • और बीच-बीच में हर पल जान का खतरा बना रहा

डॉक्टरों ने किसी भी आपात स्थिति के लिए हार्ट-लंग मशीन तक तैयार रखी थी।


🏥 ऑपरेशन के बाद भी खत्म नहीं हुआ खतरा

सर्जरी के बाद बायोप्सी में कैंसर की पुष्टि हुई, जिसके बाद बच्चे को 25 साइकिल रेडिएशन थेरेपी दी गई। हर दिन एक नई चुनौती थी… लेकिन हिम्मत और इलाज ने आखिरकार जीत दिलाई।


🌈 6 महीने बाद चमत्कार—फिर स्कूल पहुंचा बच्चा

आज, करीब 6 महीने बाद वही बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। उसने फिर से स्कूल जाना शुरू कर दिया है और इस साल कक्षा 6वीं की परीक्षा भी दी है।

यह केस इतना खास रहा कि इसे राष्ट्रीय कैंसर सर्जरी सम्मेलन में प्रस्तुत किया गया, जहां इसे बेस्ट पेपर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।


🏆 प्रदेश के लिए बनी बड़ी मिसाल

अम्बेडकर अस्पताल का यह विभाग अब छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के लिए उम्मीद का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। यहां इस तरह की 95% से ज्यादा जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा रही हैं।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने इस ऐतिहासिक सफलता पर पूरी टीम को बधाई दी है।

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