छत्तीसगढ़देश

दिल्ली में आदिवासी आंदोलन की बड़ी दस्तक! राष्ट्रपति मुर्मू से मिले गणेश राम भगत, धर्मांतरण मुद्दे पर सौंपा ज्ञापन

2 लाख लोगों के जुटान के बाद बढ़ी हलचल, डीलिस्टिंग आंदोलन को लेकर अब राष्ट्रीय स्तर पर तेज हुई चर्चा

नई दिल्ली, 28 मई।

देशभर में लंबे समय से चल रहे डीलिस्टिंग आंदोलन ने अब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश दे दिया है। जनजातीय सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने गुरुवार को महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर धर्मांतरण के मुद्दे पर ज्ञापन सौंपा। इस मुलाकात के बाद आदिवासी समाज और धर्मांतरण को लेकर चल रही बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

राष्ट्रपति भवन में हुई इस मुलाकात के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे जनजातीय प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। गणेश राम भगत ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को आदिवासी प्रतीक चिन्ह और उड़ीसा का पारंपरिक गमछा भेंट किया। बताया जा रहा है कि मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ने छत्तीसगढ़ से जुड़ी पुरानी यादों का भी जिक्र किया।

गणेश राम भगत लंबे समय से धर्मांतरित लोगों को जनजाति सूची से बाहर करने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। वर्ष 2006 से जनजातीय सुरक्षा मंच के नेतृत्व में यह अभियान देश के अलग-अलग हिस्सों में जारी है। खास तौर पर छत्तीसगढ़ और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इस आंदोलन को लगातार समर्थन मिलता रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा चर्चा तब मिली, जब 24 मई को दिल्ली के लाल किला मैदान में विशाल जनजातीय सांस्कृतिक समागम आयोजित किया गया। आयोजकों के मुताबिक इस कार्यक्रम में देशभर की 500 से अधिक जनजातियों के करीब 2 लाख लोग शामिल हुए थे।

जशपुर जिले के युवा नेता रोशन प्रताप सिंह और रामप्रकाश पांडेय ने बताया कि इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। उन्होंने इस आयोजन को “जनजातीय कुंभ” बताते हुए कहा था कि गणेश राम भगत के नेतृत्व में चल रहा यह आंदोलन भगवान बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद सदी का सबसे बड़ा आंदोलन बन चुका है।

राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान एक दिलचस्प पल भी सामने आया। बताया गया कि जब गणेश राम भगत ने अपना परिचय दिया, तो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तुरंत “छत्तीसगढ़” कहते हुए उन्हें पहचान लिया और पुराने संदर्भों को याद किया।

अब इस मुलाकात के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या आने वाले समय में धर्मांतरण और जनजातीय सूची से जुड़े मुद्दों पर कोई बड़ा फैसला या राष्ट्रीय स्तर पर नई बहस देखने को मिल सकती है।

फिलहाल दिल्ली में हुए इस घटनाक्रम ने जनजातीय समाज से जुड़े मुद्दों को फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

Related Articles

Back to top button