लॉ स्टूडेंट्स पर BCI का ‘डंडा’ नहीं चलेगा! सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब यूनिवर्सिटी ही ले सकेगी अनुशासनात्मक एक्शन
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पास लॉ कॉलेज के छात्रों के व्यक्तिगत आचरण या व्यवहार को नियंत्रित करने और उनके खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। छात्रों पर कार्रवाई संबंधित शिक्षण संस्थान के नियमों के तहत ही होगी।

नई दिल्ली। लॉ की पढ़ाई कर रहे छात्रों के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) लॉ स्टूडेंट्स के व्यक्तिगत आचरण या व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए सीधे कार्रवाई नहीं कर सकती। यदि किसी छात्र के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जरूरत पड़ती है, तो संबंधित यूनिवर्सिटी या शिक्षण संस्थान को अपने नियमों और लागू कानून के तहत फैसला लेना होगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हैदराबाद स्थित NALSAR University of Law से जुड़े विवाद के बीच आया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के छात्रों से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को आमंत्रित किया गया था। इस पर कुछ छात्रों ने लिखित रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
इसके बाद विवाद ने उस समय नया मोड़ ले लिया, जब BCI ने राज्य की संबंधित इकाइयों को निर्देश दिया था कि नालसार के 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों के एनरोलमेंट पर रोक लगाई जाए।
BCI की ओर से यह कदम छात्रों द्वारा यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में CJI के शामिल होने का विरोध किए जाने के बाद उठाया गया था।
बढ़ते विवाद के बाद BCI ने वापस लिया था आदेश
BCI के इस फैसले की व्यापक आलोचना हुई। इसके बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपना आदेश वापस ले लिया। BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने भी छात्रों से माफी मांगी थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने इस पूरे विवाद में BCI के अधिकारों की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट कर दी है।
आखिर BCI की भूमिका क्या है?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया एक वैधानिक संस्था है, जो देश में कानूनी पेशे और विधि शिक्षा के नियमन से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाती है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसका मतलब यह नहीं है कि BCI लॉ कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों के व्यक्तिगत व्यवहार पर सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।
अदालत के मुताबिक, छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का अधिकार संबंधित शिक्षण संस्थान के नियमों और लागू कानून के तहत इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
अब यूनिवर्सिटी करेगी अनुशासनात्मक कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा असर लॉ कॉलेज और यूनिवर्सिटी के छात्रों से जुड़े अनुशासनात्मक मामलों पर पड़ सकता है। यदि किसी छात्र के व्यवहार को लेकर कार्रवाई की आवश्यकता होती है, तो संबंधित शिक्षण संस्थान अपने नियमों के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।
इस फैसले के बाद यह भी साफ हो गया है कि लॉ स्टूडेंट्स के व्यक्तिगत आचरण और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के मामले में BCI की शक्तियों की एक सीमा है।
छात्रों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लॉ छात्रों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब केवल किसी छात्र के व्यक्तिगत व्यवहार या विश्वविद्यालय से जुड़े किसी विवाद के आधार पर BCI द्वारा सीधे कार्रवाई किए जाने का सवाल अदालत के सामने स्पष्ट रूप से तय हो गया है।
नालसार विवाद से शुरू हुआ यह मामला अब देशभर के लॉ छात्रों और शिक्षण संस्थानों के लिए BCI और विश्वविद्यालयों के अधिकार क्षेत्र की सीमा को समझने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।


