छत्तीसगढ़

 अवैध प्लॉटिंग पर बवाल! विधानसभा में घिरे मंत्री… 3 पटवारियों पर गिरी गाज, कई अधिकारियों को नोटिस

सत्ता और विपक्ष दोनों ने उठाए सवाल, आदिवासी जमीन सौदे पर भी मचा हड़कंप

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में उस वक्त हलचल मच गई जब छत्तीसगढ़ विधानसभा में अवैध प्लॉटिंग और जमीन घोटालों का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। हैरानी की बात यह रही कि इस बार सिर्फ विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी सरकार को घेर लिया।


🔥 मंत्री पर गंभीर आरोप, सदन में गरमाया माहौल

राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को विपक्ष ने अवैध प्लॉटिंग करने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए घेरा।

विधायक अंबिका मरकाम ने धमतरी और कांकेर में हो रही अवैध प्लॉटिंग को लेकर सवाल दागे और 2024 से 31 जनवरी 2026 तक मिली शिकायतों का पूरा ब्यौरा मांगा।


📊 आंकड़े सामने आते ही मचा हड़कंप

मंत्री टंकराम वर्मा ने बताया कि:

  • धमतरी में 3 और कांकेर में 5 शिकायतें मिलीं

  • कुल 175 खसरों में से केवल 8 की जांच पूरी हुई

  • बाकी मामलों में जांच और कार्रवाई अभी जारी है

👉 सबसे बड़ा एक्शन:
3 पटवारियों का इंक्रीमेंट रोक दिया गया
👉 साथ ही कई अधिकारी-कर्मचारियों को नोटिस भी जारी किया गया है


⚡ सत्ता पक्ष भी हुआ हमलावर

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सत्ता पक्ष के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने भी इस मुद्दे को उठाया।

विपक्ष मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखा और मामले की EOW (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) से जांच कराने की मांग कर दी।


🌾 आदिवासी जमीन सौदे पर भी बड़ा सवाल

सदन में आदिवासियों की जमीन खरीदी-बिक्री का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा।
भाजपा विधायक गोमती साय ने आरोप लगाया कि जशपुर में गैर-आदिवासियों द्वारा जमीन खरीदी गई है।

वहीं विधायक भावना बोहरा ने कवर्धा जिले में भी ऐसे ही मामलों की ओर इशारा किया और पुराने सौदों की जांच की मांग की।


🕵️ मंत्री का जवाब—‘शिकायत आएगी तो होगी जांच’

मंत्री टंकराम वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि जहां से भी शिकायतें आएंगी, वहां जांच कराई जाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि जशपुर में फिलहाल ऐसा कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है, लेकिन दो मामलों में जमीन वापस मूल मालिक को दिलाई गई है।

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