CG BREAKING: शादी की रात बना ‘मौत का मैदान’! बैंड-बाजे के विवाद में युवक की हत्या, 7 आरोपी गिरफ्तार
खुशियों के बीच गूंजा चीखों का शोर, चौथिया कार्यक्रम में लाठी-डंडों से हमला

धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के मगरलोड क्षेत्र में एक शादी समारोह उस वक्त खौफनाक मंजर में बदल गया, जब मामूली कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। बैंड-बाजे और बारातियों के बीच शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि लाठी-डंडे चलने लगे। इस हमले में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल है। दो अन्य घायलों की हालत अब खतरे से बाहर बताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि घटना बीती रात आयोजित चौथिया कार्यक्रम के दौरान हुई। शादी समारोह पूरे उत्साह और धूमधाम से चल रहा था। ढोल-नगाड़ों की आवाज, नाचते-गाते बाराती और जश्न का माहौल—लेकिन अचानक किसी बात को लेकर बैंड बाजा से जुड़े युवकों और बारातियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
मामूली विवाद बना जानलेवा झड़प
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शुरुआत में मामला छोटा था, लेकिन कुछ ही मिनटों में बहस ने उग्र रूप ले लिया। आरोप है कि बैंड बाजा से जुड़े कुछ लोगों ने गुस्से में आकर बारातियों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से समारोह स्थल पर भगदड़ मच गई। लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे, जबकि कई युवक घायल होकर जमीन पर गिर पड़े।
घायलों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने एक युवक को मृत घोषित कर दिया। एक अन्य युवक की हालत गंभीर बनी हुई है और उसका इलाज जारी है। दो अन्य घायल अब खतरे से बाहर बताए जा रहे हैं।
7 आरोपी गिरफ्तार, इलाके में तनाव
घटना की सूचना मिलते ही मगरलोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची और हालात पर काबू पाया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। सभी से पूछताछ जारी है और घटना के पीछे की पूरी वजह की जांच की जा रही है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने शांति बनाए रखने की अपील की है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
एक पल पहले जहां शादी की खुशियां थीं, वहीं अगले ही पल चीख-पुकार और मातम छा गया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि छोटे विवाद भी किस तरह जानलेवा रूप ले सकते हैं—और जश्न का मंच कैसे ‘मौत का मैदान’ बन सकता है।



