CG High Court: अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, विधवा को मिलेगी पहली प्राथमिकता… बहन का दावा क्यों हुआ खारिज?
बिलासपुर हाईकोर्ट ने 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के क्लॉज-5 का हवाला देते हुए DEO के आदेश को सही ठहराया; मृत कर्मचारी की पत्नी को मिली थी भृत्य पद पर नियुक्ति

बिलासपुर: अनुकंपा नियुक्ति को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि दिवंगत शासकीय कर्मचारी की विधवा को अनुकंपा नियुक्ति में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलेगी। यदि विधवा पात्र और उपलब्ध है, तो उसकी जगह कर्मचारी की बहन या अन्य परिजन अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते।
यह फैसला जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने दीपशिखा साहू की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) के उस आदेश को सही ठहराया, जिसके तहत मृत कर्मचारी की पत्नी को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता दीपशिखा साहू के पिता शासकीय कर्मचारी थे। सेवा के दौरान उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे और दीपशिखा के भाई अभिषेक साहू को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी।
अभिषेक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, तिलक नगर, गुढ़ियारी में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत थे। लेकिन 9 जुलाई 2021 को सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
अभिषेक के परिवार में उनकी पत्नी हीरा साहू, बहन दीपशिखा और एक दिव्यांग भाई हैं।
भाई की मौत के बाद पत्नी और बहन ने किया दावा
अभिषेक की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी हीरा साहू और बहन दीपशिखा, दोनों ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने 23 अक्टूबर 2021 को हीरा साहू को भृत्य के पद पर नियुक्ति देने का आदेश जारी किया।
इस आदेश से असहमति जताते हुए दीपशिखा ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
बहन ने नियुक्ति रद्द करने की मांग की
दीपशिखा की ओर से दलील दी गई कि उनकी भाभी हीरा साहू अलग रह रही हैं और परिवार को आर्थिक सहायता नहीं दे रही हैं। इसलिए उनकी अनुकंपा नियुक्ति को निरस्त कर उन्हें नियुक्ति दी जानी चाहिए।
मामले में राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 14 जून 2013 की अनुकंपा नियुक्ति नीति के क्लॉज-5 में पात्र परिजनों की प्राथमिकता का क्रम निर्धारित है।
नीति में किसे मिलती है पहली प्राथमिकता?
हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति नीति के क्लॉज-5 का उल्लेख करते हुए कहा कि पात्र सदस्यों के लिए प्राथमिकता का एक निर्धारित क्रम है।
इस क्रम में सबसे पहले—
- दिवंगत शासकीय सेवक की विधवा या विधुर
- पुत्र या दत्तक पुत्र
- अविवाहित पुत्री या दत्तक पुत्री
- आश्रित विधवा पुत्री
- आश्रित तलाकशुदा पुत्री
को प्राथमिकता दी गई है।
बहन को विधवा से ऊपर प्राथमिकता नहीं
कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता दीपशिखा मृत शासकीय कर्मचारी की बहन हैं, जबकि अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली हीरा साहू उनकी विधवा हैं।
नीति में विधवा को स्पष्ट रूप से प्राथमिकता दी गई है और बहन को विधवा से ऊपर कोई प्राथमिकता नहीं दी गई है।
ऐसे में जब कर्मचारी की विधवा पात्र और उपलब्ध है, तो उसकी जगह बहन को अनुकंपा नियुक्ति देने का दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
सभी तथ्यों और संबंधित नीति के प्रावधानों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने दीपशिखा साहू की याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने DEO द्वारा हीरा साहू को दी गई अनुकंपा नियुक्ति के आदेश को सही ठहराया।
अनुकंपा नियुक्ति में कौन आगे? हाईकोर्ट के फैसले ने साफ कर दिया नियम
इस फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अनुकंपा नियुक्ति केवल पारिवारिक संबंध के आधार पर नहीं, बल्कि सरकार की निर्धारित प्राथमिकता नीति के अनुसार दी जाएगी। दिवंगत कर्मचारी की पात्र विधवा के मौजूद होने पर उसकी जगह बहन या अन्य रिश्तेदार नियुक्ति का दावा नहीं कर सकते।
