छत्तीसगढ़ नान घोटाला: पूर्व IAS आलोक शुक्ला ने ED कोर्ट में किया सरेंडर, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की
भिलाई स्थित घर पर ED की छापेमारी के बाद आलोक शुक्ला ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट में सरेंडर किया। नान घोटाले में करोड़ों के भ्रष्टाचार का मामला अब अदालत में विचाराधीन।

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाला मामले में पूर्व IAS डॉ. आलोक शुक्ला ने आज ED कोर्ट में सरेंडर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज होने के बाद गुरुवार सुबह ED की टीम ने भिलाई स्थित उनके घर पर दबिश दी।
सूत्रों के अनुसार, छानबीन पूरी होने के बाद ED उन्हें गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश कर सकती है। इसी गिरफ्तारी से बचने के लिए डॉ. शुक्ला ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच ने आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने आदेश दिया कि दोनों अधिकारी पहले दो हफ्ते ED कस्टडी में और उसके बाद दो हफ्ते न्यायिक हिरासत में रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों ने 2015 में दर्ज नान घोटाला मामले और ED की जांच को प्रभावित करने की कोशिश की थी।
नान घोटाले की पूरी कहानी
नान घोटाला फरवरी 2015 में सामने आया, जब ACB/EOW ने नागरिक आपूर्ति निगम (NAN) के 25 परिसरों पर छापे मारे। इस दौरान 3.64 करोड़ रुपए नकद जब्त किए गए। जांच में पाया गया कि राइस मिलों से घटिया चावल खरीदे गए और इसके बदले करोड़ों रुपए की रिश्वत ली गई।
शुरुआत में शिव शंकर भट्ट सहित 27 लोग आरोपी थे, बाद में निगम के तत्कालीन अध्यक्ष और MD तथा दो IAS अफसरों के नाम शामिल किए गए। इस घोटाले में आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा पर EOW की जांच को प्रभावित करने का आरोप लगा।
जमानत मिलने के बाद दोनों अफसरों को कांग्रेस की भूपेश बघेल सरकार में पॉवरफुल पोस्टिंग दी गई, जिसके दौरान जांच प्रभावित होने के आरोपों ने मामला और विवादित बना दिया।
