सिर्फ 15 मिनट में पहुंचेगी एम्बुलेंस, सीएम के एक फैसले ने बदल दी पूरी तस्वीर… अब देर हुई तो क्या होगा?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 370 नई एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी, पहली बार नवजातों के लिए हाईटेक सेवा शुरू

रायपुर। आपात स्थिति में हर सेकंड की कीमत होती है, और कई बार सिर्फ कुछ मिनट की देरी जिंदगी और मौत के बीच फर्क तय कर देती है। ऐसे ही हालात को देखते हुए अब प्रदेश में एक बड़ा बदलाव शुरू हो गया है, जिसने स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदलने का दावा किया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 300 बेसिक लाइफ सपोर्ट और 70 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर प्रदेश के सभी जिलों के लिए रवाना किया। इसके साथ ही 108 एम्बुलेंस सेवा को पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से शुरू कर दिया गया है, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों तक तेजी से चिकित्सा सहायता पहुंचाई जा सके।
इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अब शहरी क्षेत्रों में 15 मिनट और ग्रामीण क्षेत्रों में 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस सेवा उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है। इसका सीधा मतलब है कि संकट की घड़ी में मदद अब पहले से कहीं ज्यादा तेजी से पहुंचेगी।
इस पूरी व्यवस्था में एक और बड़ा बदलाव किया गया है। पहली बार प्रदेश में 5 नियोनेटल एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की शुरुआत की गई है, जो खास तौर पर नवजात शिशुओं की आपातकालीन देखभाल के लिए तैयार की गई हैं। इन एम्बुलेंसों को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है, जिसमें इन्क्यूबेटर, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, सिरिंज पंप, नेब्युलाइज़र, सक्शन मशीन और 41 प्रकार की जरूरी दवाएं शामिल हैं। इन्हें चलते-फिरते नवजात आईसीयू के रूप में तैयार किया गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हो रहा है और पिछले दो वर्षों में इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि अब लोगों का भरोसा सरकारी अस्पतालों पर बढ़ रहा है, जहां समय पर इलाज मिल रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने भी इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे लाखों लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एम्बुलेंस सेवा में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही सामने आने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी और इसके लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम भी तैयार किया गया है।
नई BLS और ALS एम्बुलेंसों में भी कई आधुनिक सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जिनमें बीपी मॉनिटर, पल्स ऑक्सीमीटर, ईसीजी मॉनिटर, ग्लूकोमीटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य आपातकालीन उपकरण शामिल हैं। गंभीर मरीजों के लिए पोर्टेबल वेंटिलेटर और डिफिब्रिलेटर जैसे उन्नत उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।
अब देखना यह होगा कि कागजों पर तय यह समय सीमा जमीनी स्तर पर कितनी सटीक साबित होती है, लेकिन इतना तय है कि इस फैसले ने प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक नई उम्मीद जरूर जगा दी है।
