Cloudburst Uttarkashi : क्या धराली हादसा सिर्फ एक शुरुआत है, वैज्ञानिकों ने भविष्य में और बड़ी तबाही से किया सतर्क

नई दिल्ली । 5 अगस्त…एक और तारीखhellip;लेकिन उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बसे धराली गांव के लिए ये तारीख बन गई तबाही का पैगाम। मंगलवार की सुबह यहां बादल फटा। और फिर जो हुआhellip; वो किसी डरावने सिनेमा का सीन नहीं, बल्कि कुदरत का खौफनाक गुस्सा था।
धराली में खीरगंगा नदी उफान पर आ गई। गांव बह गया, घर ढह गए, ज़िंदगियां उजड़ गईं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये नहीं कि बादल क्यों फटाhellip;सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या इस तबाही को टाला जा सकता था? याद कीजिए 2013hellip; केदारनाथ की जलप्रलय। वही तबाहीhellip; वही पहाड़hellip; वही कुदरत का कहर। उसके बाद वादा किया गया था कि अब ऐसा नहीं होगा। “अब अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लगाया जाएगाhellip;” ऐसा सिस्टम जो लोगों को समय रहते आगाह कर देगा। लेकिन 12 साल बाद भीhellip; धराली में वो वॉर्निंग कहीं नहीं थी।
क्या होता है अर्ली वॉर्निंग सिस्टम?
जी हां, सबसे पहले समझते हैं कि आखिर ये अर्ली वॉर्निंग सिस्टम होता क्या है? अर्ली वॉर्निंग सिस्टम यानी, ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक प्रणाली जो किसी भी संभावित खतरे की जानकारी पहले से दे देती है, ताकि जान-माल को नुकसान से बचाया जा सके।
इस सिस्टम के 4 खास हिस्से होते हैं
1 – जोखिम की जानकारी:
यानी ये समझना कि खतरे कौन-कौन से हैं ndash; जैसे बाढ़, भूकंप, महामारी।
2 – निगरानी और पूर्वानुमान:
सैटेलाइट, सेंसर, मौसम विज्ञान और डेटा एनालिटिक्स के ज़रिए खतरे की निगरानी।
3 – सूचना प्रसारण:
चेतावनी को सही समय पर मोबाइल, रेडियो, टीवी, ऐप या साइरन के ज़रिए लोगों तक पहुंचाना।
4 – जवाबी कार्रवाई:
अलर्ट के बाद त्वरित राहत, बचाव और सुरक्षित स्थानों की तैयारी।
किन खतरों के लिए होता है ये सिस्टम?
– बाढ़, भूकंप, चक्रवात, सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाएं
– कोरोना, डेंगू जैसी महामारियां
– युद्ध, साइबर अटैक, आतंकी हमले
– टिड्डी दल जैसे कृषि संकट
– औद्योगिक हादसे
कहां-कहां है ये सिस्टम?
दुनिया के कई देश इस सिस्टम को प्रभावी ढंग से चला रहे हैं:
भारत
IMD ndash; चक्रवात और हीटवेव
INCOIS ndash; सुनामी चेतावनी
NDMA ndash; समन्वय संस्था
SAFAR ndash; वायु गुणवत्ता चेतावनी
जापान ndash; मोबाइल पर भूकंप की चेतावनी कुछ सेकंड पहले ही
अमेरिका ndash; NOAA और FEMA से बवंडर और तूफान चेतावनी
यूके, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपींस, जर्मनी ndash; अपने-अपने खतरों के अनुसार
ओडिशा ndash; भारत में सबसे सफल चक्रवात चेतावनी प्रणाली
लेकिन उत्तराखंड?
अब भी इंतजार मेंhellip;
धराली की तबाही के बाद फिर वही सवाल ndash;
कब आएगा उत्तराखंड में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम?
टीमें भेजी गईं ओडिशा और कर्नाटक सीखनेhellip;
लेकिन सीखने के बाद क्या हुआ?
कुछ नहींhellip;
आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट नैनीताल
आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट नैनीताल के वैज्ञानिक डा. नरेंद्र सिंह बताते हैं, धराली की खड़ी पहाड़ियों में भारी नमी वाले बादल अटक जाते हैं। बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता, और फिर होता है Cloudburst। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन इसकी चेतावनी पहले से मिल सकती है ndash; अगर सिस्टम हो तो।
तो अब सोचिएhellip;
क्या अगर धराली में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम होताhellip;तो क्या इतनी तबाही टाली जा सकती थी? उत्तर हांय में है। तो फिर देरी किस बात की? अब वक्त है चेतने का। कुदरत से टकराकर नहीं, समझदारी से निपटने का और इसके लिए जरूरी है कि अब उत्तराखंड में भी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम को सिर्फ बातों से निकालकर जमीन पर उतारा जाए।



