Dhamtari News: जंगलों और गांवों में छिपा हुनर अब पहुंचेगा देश-दुनिया तक! 20 जनजातीय कारीगरों ने सजाए स्टॉल, TRIFED देगा बड़ा बाजार

CG News: धमतरी में जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता मेला, पारंपरिक कला को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान; डिजिटल मार्केटिंग, ब्रांडिंग और पैकेजिंग पर भी दिया गया जोर
धमतरी, 22 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में जनजातीय कलाकारों और कारीगरों के पारंपरिक हुनर को स्थानीय बाजार से निकालकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई। लाइवलीहुड कॉलेज में जनजातीय कारीगर सूचीबद्धता (एम्पैनलमेंट) मेला आयोजित किया गया, जिसका आयोजन जनजातीय कार्य मंत्रालय के अधीन TRIFED और जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से किया।
एक दिवसीय मेले में जिले के 20 कलाकारों और कारीगरों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उद्यमियों को TRIFED से सूचीबद्ध होने का अवसर भी दिया गया।
अब गांव के हुनर को मिलेगा राष्ट्रीय बाजार
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने कहा कि यह पहल जनजातीय कलाकारों को अपनी कला और हुनर प्रदर्शित करने के लिए एक प्रभावी मंच देगी।
TRIFED से सूचीबद्ध होने के बाद कारीगरों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों, ‘जनजातीय भारत’ बिक्री केंद्रों, मेलों और विभिन्न विपणन गतिविधियों में भाग लेने के अवसर मिलेंगे। इससे स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार और कारीगरों को आय के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
कलेक्टर बोले- सोशल मीडिया से दुनिया तक पहुंचाएं अपना हुनर
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि आज के दौर में आजीविका केवल आय का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम भी है।
उन्होंने कारीगरों से अपने उत्पादों को सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों का सही इस्तेमाल करके कारीगर सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना सकते हैं और अपने उत्पादों की बाजार क्षमता बढ़ा सकते हैं।
सिर्फ हुनर काफी नहीं, ब्रांडिंग और पैकेजिंग भी जरूरी
कलेक्टर ने जिले में उपलब्ध वन उपज और स्थानीय संसाधनों का उल्लेख करते हुए युवाओं को प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक और ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। नगरी क्षेत्र में उपलब्ध सतावर के अलावा लाख, इमली और अन्य वन उपज का वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रसंस्करण करके बेहतर आय अर्जित की जा सकती है।
उन्होंने युवाओं और जनजातीय समाज के लोगों से प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना समेत उद्योग विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की।
कारीगरों को दिया जाएगा खास प्रशिक्षण
जिला प्रशासन अब जनजातीय कारीगरों का एक विशेष बैच तैयार करने की योजना बना रहा है। इन कारीगरों को सोशल मीडिया मार्केटिंग, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, बाजार प्रबंधन और उत्पाद प्रस्तुतीकरण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसका उद्देश्य पारंपरिक कौशल को आधुनिक उद्यमिता से जोड़ना है, ताकि कारीगर अपने उत्पादों को सिर्फ स्थानीय हाट-बाजार तक सीमित न रखें, बल्कि बड़े बाजारों तक पहुंच बना सकें।
जनजातीय कला को मिलेगी नई पहचान
सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष जे.एल. ध्रुव ने कहा कि जनजातीय समाज की अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा, कला और शिल्प शैली है। यदि इन कारीगरों को उचित बाजार और मार्केट लिंकेज मिल जाए तो उनकी आय और जीवन स्तर में बड़ा सुधार हो सकता है।
उन्होंने कहा कि इससे धमतरी जिले की पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का रास्ता भी खुलेगा।
स्टॉल में दिखी पारंपरिक कला की झलक
मेले में अधिकारियों और अतिथियों ने कारीगरों के स्टॉल का अवलोकन किया और उनके उत्पादों, बाजार की मांग और आय से जुड़ी जानकारी ली।
स्टॉलों पर वस्त्र एवं हस्तकला, धातु शिल्प, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद, मिट्टी शिल्प, बांस-बेंत शिल्प, जनजातीय आभूषण, उपहार सामग्री, उपयोगी वस्तुएं और चित्रकला समेत कई तरह के उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
TRIFED नेटवर्क से जुड़ने का रास्ता खुला
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास ने बताया कि यह मेला जिले के जनजातीय कारीगरों और उद्यमियों को TRIFED के व्यापक विपणन नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने पात्र कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों, किसान उत्पादक संगठनों और जनजातीय उद्यमियों से अपील की कि वे अपने उत्कृष्ट उत्पादों के साथ ऐसे अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
अब पारंपरिक कला, स्थानीय संसाधनों और आधुनिक बाजार के इस मेल से धमतरी के जनजातीय कारीगरों के हुनर को गांव से निकलकर देश-दुनिया तक पहुंचने का नया रास्ता मिलने की उम्मीद है।


