धमतरी का कुख्यात मगरलोड भर्ती घोटाला फिर सुर्ख़ियों में! 17 साल बाद बड़ी कार्रवाई, तीन आरोपी चढ़े पुलिस के हत्थे
फर्जी अंकतालिका और नकली प्रमाणपत्रों से मिली थी नौकरी, 183 पर अब भी जारी है जांच – शिक्षा व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

धमतरी: जिले का चर्चित मगरलोड भर्ती घोटाला एक बार फिर से चर्चा में है। साल 2007 की शिक्षाकर्मी वर्ग-3 भर्ती में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई थी, जिसे अब पुलिस ने दोबारा खंगालना शुरू किया है। इस मामले में पुलिस ने ताज़ा कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में सीताराम कुर्रे, इशू कुमार साहू और तत्कालीन जनपद उपाध्यक्ष कोमल यादव शामिल हैं। ये तीनों चयन समिति के सदस्य थे। भले ही वर्तमान में इनका किसी पद से संबंध नहीं है, लेकिन जांच में इनके खिलाफ पुख़्ता सबूत मिलने पर गिरफ्तारी की गई।
गौरतलब है कि इस भर्ती घोटाले में 150 पदों की जगह 172 नियुक्तियां कर दी गई थीं। कई अपात्र उम्मीदवारों को फर्जी अंकतालिका, अनुभव पत्र और झूठे प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी दिलाई गई थी।
यह मामला सबसे पहले 2011 में सामने आया, जब एक आरटीआई कार्यकर्ता ने शिकायत की थी। इसके बाद पुलिस और सीआईडी ने जांच शुरू की, लेकिन कार्रवाई की रफ्तार बेहद धीमी रही।
पहले भी इस घोटाले में कई आरोपी सजा पा चुके हैं। साल 2020 में दस शिक्षाकर्मियों को फर्जी डिग्री पर नौकरी करने का दोषी मानते हुए अदालत ने 5 साल की सश्रम कैद और जुर्माने की सजा सुनाई थी। फिलहाल इस मामले में 183 लोगों पर जांच जारी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से कई अब भी सरकारी नौकरी में हैं और मोटी तनख्वाह ले रहे हैं, जिससे पूरी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
