धमतरी की खेती में आने वाला है बड़ा बदलाव! 10 गांवों में पहुंचीं हाईटेक मशीनें, अब कम खर्च में ज्यादा होगी कमाई
डीएसआर तकनीक और आधुनिक सीड ड्रिल मशीनों से किसानों की बदलेगी तस्वीर, खेती में शुरू हुआ नई तकनीक का दौर

रायपुर। धमतरी जिले की खेती अब परंपरागत तरीकों की सीमाओं से निकलकर आधुनिक तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रही है। किसानों की आय बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है, जिसके तहत 10 गांवों को आधुनिक सीड ड्रिल मशीनों की सौगात मिली है। माना जा रहा है कि यह पहल आने वाले वर्षों में खेती की पूरी तस्वीर बदल सकती है।
कुरूद विकासखंड में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चयनित गांवों के कस्टम हायरिंग सेंटरों को आधुनिक सीड ड्रिल मशीनें प्रदान की गईं। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र चर्रा में आयोजित इस कार्यक्रम में किसानों ने नई तकनीकों को लेकर उत्साह दिखाया।
सेंटर फॉर एडवांस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (CARD) संस्था की पहल से शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि उपकरणों की पहुंच सुनिश्चित करना है। अब किसानों को महंगे कृषि यंत्र खरीदने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि कस्टम हायरिंग सेंटरों के माध्यम से कम लागत पर इनका उपयोग किया जा सकेगा।
इस योजना का लाभ कन्हारपुरी, मोंगरा, कुर्रा, देवरी, राखी, गातापार, भैसबोड़, कुहकुहा, अटंग और बकली सहित 10 गांवों को मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान CARD फाउंडेशन और कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय कृषक कार्यशाला भी आयोजित की गई, जिसमें किसानों को धान की सीधी कतार बुवाई यानी डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक की जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि डीएसआर तकनीक पारंपरिक रोपा पद्धति की तुलना में कई मायनों में अधिक लाभकारी है। इससे बीज की खपत कम होती है, मजदूरी खर्च में कमी आती है और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पानी की बचत होती है। वर्तमान समय में जल संरक्षण की बढ़ती आवश्यकता को देखते हुए यह तकनीक किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से उत्पादन लागत कम होगी और फसल की उत्पादकता में वृद्धि होगी। इसका सीधा लाभ किसानों की आय पर दिखाई देगा। यही कारण है कि कृषि विभाग लगातार किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने पर जोर दे रहा है।
जिला प्रशासन भी इस पहल को विकसित धमतरी के लक्ष्य से जोड़कर देख रहा है। अधिकारियों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और यंत्रीकरण से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम के अंत में जब सीड ड्रिल मशीनों को हरी झंडी दिखाकर गांवों के लिए रवाना किया गया तो यह केवल मशीनों की विदाई नहीं थी, बल्कि आधुनिक खेती की ओर बढ़ते धमतरी के नए सफर की शुरुआत भी थी। उम्मीद की जा रही है कि यह पहल आने वाले समय में किसानों की लागत घटाने, उत्पादन बढ़ाने और खेती को अधिक लाभकारी बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।
धमतरी के इन 10 गांवों में शुरू हुआ यह प्रयोग यदि सफल रहता है, तो यह मॉडल प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है और छत्तीसगढ़ की कृषि व्यवस्था में एक नई क्रांति का आधार तैयार कर सकता है।


