छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में शराब खरीदने का तरीका बदला! अब प्रीमियम दुकानों पर कैश नहीं चलेगा, बोतल लेने के लिए करना होगा ऑनलाइन पेमेंट

ओवररेट की शिकायतों पर आबकारी विभाग का बड़ा फैसला, प्रदेश की 49 प्रीमियम शराब दुकानों में 1 अक्टूबर से लागू होगी कैशलेस व्यवस्था; QR कोड स्कैन कर करना होगा भुगतान

रायपुर। छत्तीसगढ़ में प्रीमियम शराब दुकानों से शराब खरीदने वालों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब इन दुकानों पर कैश देकर शराब नहीं खरीदी जा सकेगी। ग्राहकों को बोतल खरीदने के बाद भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा।

दरअसल, प्रदेश की कई प्रीमियम शराब दुकानों में निर्धारित MRP से ज्यादा कीमत पर शराब बेचने यानी ओवररेटिंग की शिकायतें सामने आ रही थीं। इन्हीं शिकायतों पर लगाम लगाने और बिक्री में पारदर्शिता लाने के लिए आबकारी विभाग ने यह फैसला लिया है।

49 प्रीमियम दुकानों पर लागू होगा नया सिस्टम

आबकारी विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, प्रदेश की 49 प्रीमियम शराब दुकानों को कैशलेस किया जाएगा। इन दुकानों पर ग्राहकों को नकद भुगतान की सुविधा नहीं मिलेगी।

शराब खरीदने के बाद ग्राहक दुकान में लगाए गए QR कोड को स्कैन कर ऑनलाइन भुगतान कर सकेंगे। यानी अब जेब में कैश होने के बावजूद प्रीमियम दुकान से शराब खरीदने के लिए डिजिटल पेमेंट करना जरूरी होगा।

1 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में कैशलेस व्यवस्था

यह नई व्यवस्था 1 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी। इसके लिए सभी संबंधित प्रीमियम शराब दुकानों में QR कोड लगाए जाएंगे।

विभाग का मानना है कि डिजिटल भुगतान होने से शराब की बिक्री और भुगतान का रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी तरीके से दर्ज किया जा सकेगा।

ओवररेटिंग पर लगेगी लगाम?

प्रीमियम शराब दुकानों में MRP से अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायतें लगातार सामने आने के बाद विभाग ने यह कदम उठाया है। कैशलेस व्यवस्था से भुगतान का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा, जिससे बिक्री और वसूली में गड़बड़ी की निगरानी आसान हो सकती है।

हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने के बाद ओवररेट की शिकायतों पर कितना असर पड़ता है, यह देखने वाली बात होगी।

शराब खरीदने वालों के लिए जरूरी बदलाव

अब प्रीमियम शराब दुकान पर जाने से पहले ग्राहकों को यह ध्यान रखना होगा कि कैश के बजाय ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा उपलब्ध हो। QR कोड स्कैन कर भुगतान करने के बाद ही शराब की खरीदारी की जा सकेगी।

आबकारी विभाग का यह कदम मुख्य रूप से ओवररेट की शिकायतों को कम करने और शराब बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

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