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नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा! 734 मौतों के बाद भोटेकोशी नदी ने बढ़ाया जलस्तर, क्या टली नहीं है आफत?

भीषण फ्लैश फ्लड के कुछ दिन बाद नदी का पानी फिर बढ़ा, प्रशासन ने रेस्क्यू टीमों को किया अलर्ट; सुरंगों में अब भी 100 से ज्यादा लोगों के फंसे होने की चिंता

काठमांडू। नेपाल में कुछ दिन पहले आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड से मची तबाही के बाद एक बार फिर खतरे की घंटी बजती नजर आ रही है। रविवार को भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद नेपाली प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित जिलों में तैनात खोज और बचाव दलों को सतर्क रहने और एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने भी नदी के बढ़ते जलस्तर को लेकर चेतावनी जारी की है। प्राधिकरण ने कहा कि बाढ़ प्रभावित भोटेकोशी नदी का पानी कुछ बढ़ा है, इसलिए सभी संबंधित लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है।

कुछ दिन पहले इसी नदी ने मचाई थी तबाही

हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बुधवार को आई भीषण अचानक बाढ़ के दौरान भारी मात्रा में पानी लेकर मध्य नेपाल की ओर पहुंची थी। तेज बहाव ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई और सड़क, पुल तथा अन्य बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया।

अब कुछ ही दिनों बाद नदी का जलस्तर दोबारा बढ़ने से प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। राहत और बचाव अभियान पहले से ही जारी है, ऐसे में नदी का बढ़ता पानी रेस्क्यू टीमों के लिए भी खतरा बढ़ा सकता है।

734 लोगों की मौत, 2500 अब भी लापता

नेपाल में आई फ्लैश फ्लड की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आपदा में अब तक 734 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 2,500 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं।

बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों, मलबे और नदी के आसपास के क्षेत्रों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। बड़ी संख्या में लोगों के अब तक नहीं मिलने के कारण उनके परिवारों की चिंता बनी हुई है।

सुरंगों में फंसे हैं 100 से ज्यादा कर्मचारी

बाढ़ के बाद हाइड्रोपावर परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना बचाव दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। बताया जा रहा है कि 100 से ज्यादा कर्मचारी अब भी सुरंगों में फंसे हुए हैं।

इन लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए विशेष रेस्क्यू टीमों की मदद ली जा रही है। भारत और चीन की विशेषज्ञ बचाव टीमें भी अभियान में सहयोग कर रही हैं।

पुनर्निर्माण पर खर्च होंगे अरबों डॉलर

नेपाल के सामने अब सिर्फ लोगों को बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि तबाह हुए इलाकों को दोबारा खड़ा करना भी बड़ी चुनौती बन गया है। सरकार को राहत, पुनर्वास और पुनर्निर्माण पर अरबों डॉलर खर्च होने का अनुमान है।

इसी वजह से नेपाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आर्थिक सहायता की मांग कर रहा है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पुल, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं को फिर से बहाल किया जा सके।

भारत ने हिमालयी ग्लेशियरों की निगरानी बढ़ाई

नेपाल की आपदा को ग्लेशियर और ग्लेशियल झीलों से जोड़कर देखे जाने के बाद भारत में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। उत्तराखंड में हिमालयी ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी तेज की गई है।

विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि कहीं ग्लेशियर या ग्लेशियल झीलों में किसी तरह का बदलाव भविष्य में अचानक बाढ़ का कारण न बने।

दुनिया के कई देशों से मिल रही मदद

नेपाल की मुश्किल घड़ी में अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी मदद के लिए आगे आया है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और IFRC की ओर से नेपाल के लिए मानवीय सहायता का ऐलान किया गया है। चीन ने भी नेपाल को मदद की पेशकश की है।

लेकिन भोटेकोशी नदी का दोबारा बढ़ता जलस्तर राहत अभियान के बीच नई चिंता पैदा कर रहा है। एक तरफ रेस्क्यू टीमें मलबे और सुरंगों में जिंदगी तलाश रही हैं, तो दूसरी तरफ नदी का बढ़ता पानी फिर किसी बड़े खतरे का संकेत तो नहीं—अब प्रशासन इसी पर नजर बनाए हुए है।

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