दिल्ली की घटना के बाद CM साय का बड़ा एक्शन प्लान, अब जर्जर भवनों से लेकर हॉस्टल-कोचिंग तक होगी जांच… लापरवाही मिली तो अफसरों की खैर नहीं!
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में हॉस्टल, PG, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल सेफ्टी ऑडिट कराने के दिए निर्देश

रायपुर। दिल्ली में भवन ढहने की घटना के बाद छत्तीसगढ़ सरकार भी अलर्ट मोड पर आ गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रदेश में विद्यार्थियों और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि किसी हादसे के बाद कार्रवाई करना ही प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि संभावित खतरे की पहले से पहचान कर उसे खत्म करना भी उतना ही जरूरी है।
मुख्यमंत्री साय ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय, रायपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी संभागायुक्तों, पुलिस महानिरीक्षकों, कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की।
हॉस्टल से लेकर कोचिंग सेंटर तक तत्काल जांच
मुख्यमंत्री ने सभी जिलों में हॉस्टल, PG, कोचिंग सेंटर, स्कूल और बड़े शैक्षणिक भवनों का तत्काल निरीक्षण एवं सेफ्टी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान जहां भी सुरक्षा संबंधी कमियां सामने आती हैं, वहां सुधार के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय की जाए और निर्धारित अवधि में जरूरी सुधार हर हाल में कराया जाए।
CM साय ने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को अपने-अपने जिलों में इस पूरी प्रक्रिया की नियमित निगरानी करने के निर्देश दिए, ताकि शासन के निर्देश केवल कागजों तक सीमित न रहें और उनका असर जमीन पर दिखाई दे।
पुराने और जर्जर भवनों की होगी पहचान
मुख्यमंत्री ने स्कूलों, पुस्तकालयों, छात्रावासों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद पुराने एवं जर्जर भवनों की वास्तविक स्थिति का आकलन करने को कहा है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे भवनों की पहचान तत्काल की जाए, जिनसे किसी तरह की जनहानि की आशंका हो सकती है। जोखिमपूर्ण भवनों के मामले में जरूरी कार्रवाई में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें संभावित जोखिमों को हादसा होने से पहले ही पहचान लिया जाए। खासकर बच्चों और विद्यार्थियों से जुड़े संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
शिकायत का इंतजार नहीं, लगातार होगी निगरानी
CM साय ने अधिकारियों को निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी शिकायत या दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने की बजाय सतत निगरानी और समय रहते सुधार की कार्यसंस्कृति विकसित करनी होगी।
यानी अब किसी हादसे या शिकायत का इंतजार करने के बजाय जोखिम वाले भवनों और संस्थानों की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जिम्मेदारी अधिकारियों की होगी।
अवैध और मिलावटी शराब के खिलाफ भी सख्ती
बैठक में मुख्यमंत्री ने अवैध एवं मिलावटी शराब के निर्माण, बिक्री, भंडारण और परिवहन के खिलाफ भी कठोर अभियान चलाने के निर्देश दिए।
उन्होंने आबकारी विभाग, पुलिस और जिला प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ विशेष अभियान चलाने को कहा। जिन क्षेत्रों में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री या मिलावट की आशंका है, वहां संयुक्त टीम बनाकर छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ेगी निगरानी
मुख्यमंत्री ने पुलिस और आबकारी विभाग को सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान करने और संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। अवैध शराब के निर्माण या मिलावट में संलिप्त पाए जाने वालों के खिलाफ कठोरतम वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
लापरवाही हुई तो तय होगी अफसरों की जवाबदेही
बैठक में मुख्यमंत्री साय ने सबसे सख्त संदेश देते हुए कहा कि शासन के निर्देशों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही या उदासीनता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
उन्होंने कहा कि लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों को बैठक में दिए गए निर्देशों पर तत्काल अमल शुरू करने और जिलों में हुई कार्रवाई की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


