लालकिले पर जुटा जनजातीय महासागर! PM मोदी ने कहा- दिल्ली ने आज तक नहीं देखा इतना बड़ा आयोजन
गणेश राम भगत ने किया स्वागत, करीब पौन घंटे तक जनजातीय प्रतिनिधियों से हुई सीधी बातचीत

नई दिल्ली/जशपुर, 28 मई।
दिल्ली के ऐतिहासिक लालकिले पर हुए विशाल जनजाति समागम ने राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति और सामाजिक हलकों में बड़ी चर्चा छेड़ दी है। देशभर से पहुंचे लाखों जनजातीय प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस आयोजन को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि “लालकिले पर इतना बड़ा जनजाति समागम आज तक नहीं हुआ।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम के बाद देश के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे जनजातीय प्रतिनिधिमंडलों से आत्मीय मुलाकात की और उनके साथ लंबी चर्चा की। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी ने करीब पौन घंटे तक प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं, सुझाव और अनुभव सुने।
इस दौरान छत्तीसगढ़ जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को छत्तीसगढ़ के दूरस्थ जनजातीय इलाकों में डबल इंजन सरकार के जरिए हो रहे विकास कार्यों की जानकारी भी दी।
गणेश राम भगत ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से आदिवासी और गरीब वर्ग के जीवन में तेजी से बदलाव आ रहा है। उन्होंने जनजातीय समाज के लिए चल रहे अभियानों और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिनिधियों से बातचीत के दौरान जनजातीय समाज के विकास, शिक्षा, संस्कृति और परंपराओं को लेकर विशेष रुचि दिखाई। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज देश की सांस्कृतिक पहचान और विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है और उनके विकास के लिए लगातार काम करने की जरूरत है।
पीएम मोदी ने इस विशाल आयोजन के लिए जनजाति सुरक्षा मंच और कल्याण आश्रम की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संगठन जनजातीय समाज के हित में अच्छा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने मंच के पदाधिकारियों से समाजहित के कार्यों को लगातार जारी रखने का आग्रह भी किया।
लालकिले पर हुए इस आयोजन को लेकर राजधानी दिल्ली में भी खास चर्चा रही। क्योंकि इतने बड़े स्तर पर जनजातीय समाज की मौजूदगी और सांस्कृतिक शक्ति प्रदर्शन को हाल के वर्षों के सबसे बड़े आयोजनों में से एक माना जा रहा है।
अब इस कार्यक्रम के बाद जनजातीय समाज से जुड़े मुद्दों, सामाजिक अभियानों और राष्ट्रीय स्तर पर उनकी राजनीतिक भागीदारी को लेकर नई बहस और चर्चाएं तेज होती दिखाई दे रही हैं।


