छत्तीसगढ़

रानी लक्ष्मीबाई को राज्यपाल ने किया नमन, लोकभवन में गूंजा वीरता और बलिदान का गौरवगान

बलिदान दिवस पर राज्यपाल रमेन डेका ने अर्पित की पुष्पांजलि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समेत कई गणमान्य हुए शामिल

 

रायपुर। वीरता, साहस और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान की प्रतीक वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस पर आज लोकभवन में श्रद्धा और सम्मान का भावपूर्ण वातावरण देखने को मिला। राज्यपाल रमेन डेका ने रानी लक्ष्मीबाई के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया और उनके अदम्य साहस एवं देशभक्ति को याद किया।

इस अवसर पर लोकभवन में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना सहित लोकभवन के अधिकारी एवं कर्मचारियों ने भी रानी लक्ष्मीबाई को श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनों ने स्वतंत्रता संग्राम में रानी लक्ष्मीबाई के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें राष्ट्र की प्रेरणास्रोत वीरांगना बताया। वक्ताओं ने कहा कि रानी लक्ष्मीबाई का जीवन साहस, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति का अनुपम उदाहरण है, जो आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है।

रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था, जबकि परिवार और परिचित उन्हें स्नेहपूर्वक ‘मनु’ कहकर पुकारते थे। उनके पिता मोरोपंत तांबे मराठा परंपरा से जुड़े थे और पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में सेवा करते थे। बचपन से ही मनु ने शास्त्रों के साथ-साथ शस्त्रों की शिक्षा भी प्राप्त की थी।

वर्ष 1842 में उनका विवाह झांसी के राजा गंगाधर राव नेवालकर के साथ हुआ, जिसके बाद वे झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के नाम से प्रसिद्ध हुईं। जीवन में अनेक व्यक्तिगत दुखों का सामना करने के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष का नेतृत्व किया।

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में रानी लक्ष्मीबाई का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उनका बलिदान आज भी देशभक्ति, नारी शक्ति और आत्मसम्मान की मिसाल माना जाता है। बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने उनके आदर्शों पर चलने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संकल्प भी लिया।

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