इंसानियत शर्मसार! जिंदा बकरों को दांतों से काटा, तड़पता छोड़ दिया मौत के लिए — तेलंगाना में ‘बलि’ के नाम पर क्रूरता की सारी हदें पार

जगतियाल (तेलंगाना)।
तेलंगाना के जगतियाल जिले से सामने आया यह मामला इंसानियत को झकझोर देने वाला है। जतरा के नाम पर ऐसी भयावह क्रूरता की गई, जिसे देख लोगों की रूह कांप गई। रायकल क्षेत्र के भीमेश्वर मंदिर में आयोजित भीमन्ना जातरा के दौरान करीब 50 जिंदा बकरों की बलि दी गई — लेकिन यह बलि नहीं, बल्कि सरेआम यातना थी।
🩸 दांतों से काटा, खून बहता रहा… और मौत का इंतजार
इस अनुष्ठान को स्थानीय परंपरा ‘गावु पट्टाडम’ कहा जाता है। इसमें बकरों को जिंदा पकड़कर उनके गले पर दांतों से काटा जाता है। जानवरों को तुरंत नहीं मारा जाता, बल्कि उन्हें तड़पते हुए, खून बहाते हुए मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।
यह दृश्य इतना खौफनाक था कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने लोगों को अंदर तक हिला दिया।
📹 वीडियो वायरल, भीड़ तमाशबीन बनी रही
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि लोग बकरों को पकड़कर उनके गले में दांत गड़ा रहे हैं। जानवर दर्द से चीखते, छटपटाते नजर आते हैं, जबकि आसपास मौजूद भीड़ यह सब तमाशे की तरह देखती रही।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब मंदिर परिसर के अंदर हुआ, जहां उस वक्त पुलिसकर्मी भी मौजूद थे।
🚫 मंदिरों में बलि पर रोक, फिर कैसे हुआ ये सब?
पशु प्रेमी और शिकायतकर्ता अडुलापुरम गौतम ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह जानवरों के साथ अमानवीय और गैरकानूनी व्यवहार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि—
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किसी अधिकारी ने रोकने की कोशिश नहीं की
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जबकि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और तेलंगाना के नियमों के तहत
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मंदिरों या सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर जानवरों की बलि पूरी तरह प्रतिबंधित है
इसके बावजूद ऐसी प्रथाएं खुलेआम जारी हैं।
👮♂️ पुलिस का दावा: “हमने बलि नहीं देखी”
रायकल पुलिस का कहना है कि जतरा के दौरान उन्हें किसी बलि की जानकारी नहीं मिली। हालांकि, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने आयोजकों और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस के मुताबिक, जांच जारी है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
⚠️ पुरानी प्रथा, नया विवाद
यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी तेलंगाना में बोनालु जैसे त्योहारों और स्थानीय जतराओं के दौरान ‘गावु पट्टाडम’ जैसी क्रूर प्रथाएं सामने आती रही हैं।
PETA इंडिया और SAFI जैसे पशु अधिकार संगठन लंबे समय से इन पर रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। उनका साफ कहना है—
👉 धार्मिक आस्था के नाम पर जानवरों की यातना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है।


