Raipur Sahitya Utsav की भव्य शुरुआत! हरिवंश ने किया उद्घाटन, साहित्य के मंच पर छत्तीसगढ़ बना विचारों की राजधानी
सीएम साय की मौजूदगी, पुरखौती मुक्तांगन में सजेगा शब्द–संवाद का महासंगम, तीन दिन तक गूंजेगा साहित्य

रायपुर। Raipur Sahitya Utsav Live का आगाज़ राजधानी रायपुर में बेहद भव्य और गरिमामय माहौल में हुआ। राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ करते हुए कहा कि साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होता है और ऐसे आयोजन विचार, संवाद और संवेदना को नई दिशा देते हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी मंच पर मौजूद रहे।
उद्घाटन समारोह के दौरान जनसंपर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव और आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल ने राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश और मुख्यमंत्री साय का आत्मीय स्वागत किया। साहित्य प्रेमियों के लिए यह पल किसी उत्सव से कम नहीं था।
सीएम साय से सौजन्य मुलाकात, सम्मान में भेंट की नंदी
रायपुर साहित्य उत्सव से पहले राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने राजधानी स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शॉल और प्रतीक चिन्ह ‘नंदी’ भेंट कर उनका सम्मान किया। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार पंकज झा भी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि हरिवंश इस उत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं।
23 जनवरी: महिला लेखन से डिजिटल साहित्य तक मंथन
रायपुर साहित्य उत्सव के पहले दिन अलग-अलग मंडपों में साहित्यिक विचारों की धारा बही।
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लाला जगदलपुरी मंडप में समकालीन महिला लेखन
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श्यामलाल चतुर्वेदी मंडप में संवाद वंदेमातरम: भारत के स्व-जागरण का प्रवाह
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अनिरुद्ध नीरव मंडप में डिजिटल साहित्य: प्रकाशकों के लिए चुनौती
दूसरे और तीसरे सत्र में वाचिक परंपरा, कविता की नई चाल, जनजातीय विमर्श और छत्तीसगढ़ के साहित्यिक अवदान पर गहन चर्चाएं हुईं।
दिन के अंत में सांस्कृतिक संध्या के तहत शाम 7 बजे विनोद कुमार शुक्ल मंडप में मनोज जोशी द्वारा ‘चाणक्य’ नाटक का मंचन हुआ, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
24 जनवरी: उपनिषद से AI तक, साहित्य के हर रंग पर संवाद
उत्सव के दूसरे दिन साहित्य का दायरा और व्यापक हो गया।
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राष्ट्र सेवा के सौ वर्ष
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धार्मिक फिल्में और टेली धारावाहिक
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भारत का बौद्धिक विमर्श
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साहित्य: उपनिषद से AI तक
जैसे विषयों पर चर्चाओं ने श्रोताओं को सोचने पर मजबूर कर दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी की स्मृति में काव्य पाठ ने माहौल को भावुक कर दिया।
25 जनवरी: संविधान, पत्रकारिता और सिनेमा पर बड़ा विमर्श
उत्सव के अंतिम दिन
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संविधान और भारतीय मूल्य
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पत्रकारिता और साहित्य
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सिनेमा और समाज
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छत्तीसगढ़ी काव्य पाठ
जैसे विषयों पर चर्चाएं होंगी, जो साहित्य और समाज के रिश्ते को नए नजरिये से सामने लाएंगी।

