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तालियों की गूंज, मुस्कुराते चेहरे, हाथों में तिरंगा.चंद्रयान के चांद छूते ही खुशी से झूम उठा भारत

हिंदुस्तान ने वो कर दिखाया है जो अब तक सिर्फ तीन देश ही कर पाए थे. 140 करोड़ लोगों वाला देश भारत चांद पर पहुंचने वाला दुनिया का चौथा मुल्क बन गया है. ISRO के मिशन मून चंद्रयान-3 ने साउथ पोल पर लैंड किया, जो अब तक कोई देश नहीं कर पाया था.

चंद्रयान-3 को 23 अगस्त को शाम 6.04 बजे चांद पर उतरना था और सब कुछ तय समय के मुताबिक हुआ. घड़ी की सुई जब 6.04 पर पहुंची तो पूरा देश झूम उठा. लोग अपने हाथों में तिरंगा लेकर निकल पड़े, घर और ऑफिस लोगों की तालियों से गूंज उठे.

इस पल का इंतजार भारतवासी 14 जुलाई से कर रहे थे. ये वो दिन था जब चंद्रयान-3 को चांद की कक्षा की ओर भेजा गया. इसके बाद हर गुजरते दिन के साथ लोग चंद्रयान-3 के अपडेट का इंतजार करते थे. जैसे-जैसे चंद्रयान-3 एक एक करके पड़ावों को पार कर रहा था दिल को सुकून मिलता था. और आखिर में 23 अगस्त की वो तारीख भी आ गई जब चंद्रयान-3 को चांद की सतह पर उतरना था.

सब कुछ सज गया था. पूजा-पाठ हो रहे थे. जगह-जगह हवन हो रहे थे. चंद्रयान के सफल होने की दुआ मांगी जा रही थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए साउथ अफ्रीका में हैं, लेकिन उनका ध्यान चंद्रयान पर ही था. शाम को 5.20 बजे इसरो ने यूट्यूब पर लाइव प्रसारण शुरू किया. पहले से 3.50 लाख लोग लाइव टेलिकास्ट देखने के लिए इंतजार कर रहे थे.

 

 

 

लाइव देखने वालों की बढ़ती गई संख्या

जैसे-जैसे समय बिता लोगों की संख्या भी बढ़ती गई. जब फाइनल घड़ी आई तो करीब 85 लाख लोगों ने लाइव देखा. पीएम मोदी साउथ अफ्रीका से जुड़ गए थे. लोगों के दिल की धड़कनें बढ़ गईं. और वो ऐतिहासिक घड़ी भी आ गई जिसका लोग लंबे समय से इंतजार कर रहे थे. 6.04 बजते ही इसरो ने ऐलान किया कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग सफल हुई. बस ये घोषणा होते ही लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. लोगों का सीना चौड़ा हो गया. क्या मॉल, क्या खेल का मैदान और क्या मंदिर-मस्जिद…हर तरफ सिर्फ और सिर्फ तालियों की आवाज सुनाई दी.

लोग तिरंगा लेकर सड़कों पर निकल पड़े. इंडिया गेट पर लोग जुट गए. फेसबुक, Whatsapp पर लोगों के स्टेटस बदल गए. इसरो को देश और दुनिया से बधाइयां मिलने लगीं. साइकिल और बैलगाड़ी पर रॉकेट ले जाने वाला इसरो आज चांद पर पहुंचा है. वो अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा को टक्कर दे रहा है. इस सफलता के बाद इसरो की पहचान वर्ल्ड वाइड हो गई. दुनिया में इसरो अब किसी परिचय का मोहताज नहीं होगा.

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