टेक्नोलॉजी

भारत का ‘भार्गवास्त्र’ और रोबोट सैनिक तैयार! माइनस 40°C में भी करेंगे गश्त, नागपुर में रोबोटिक्स-UAV फैक्ट्री का भूमिपूजन

नागपुर में डिफेंस टेक्नोलॉजी को बड़ा बढ़ावा, रोबोट सैनिक और अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम ‘भार्गवास्त्र’ पर काम तेज; सीमाओं की सुरक्षा होगी और मजबूत।


नागपुर में डिफेंस टेक्नोलॉजी का बड़ा कदम

महाराष्ट्र के नागपुर में एक बड़ी रक्षा परियोजना की शुरुआत हुई है। यहां Solar Defence and Aerospace Limited द्वारा स्थापित किए जाने वाले रोबोटिक्स और यूएवी (ड्रोन) निर्माण संयंत्र का भूमिपूजन किया गया।

इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis और केंद्रीय मंत्री Nitin Gadkari मौजूद रहे। यह संयंत्र नागपुर के मिहान-SEZ क्षेत्र में स्थापित किया जा रहा है।


माइनस 40 डिग्री में गश्त करने वाला रोबोट

इस परियोजना के जरिए अगले साल तक ऐसा रोबोट सैनिक तैयार किया जाएगा जो देश की सीमाओं पर माइनस 40 डिग्री सेल्सियस जैसी कड़ाके की ठंड में भी गश्त कर सकेगा।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत के सैनिक अक्सर Siachen Glacier और चीन सीमा जैसे बेहद कठिन इलाकों में तैनात रहते हैं, जहां तापमान बेहद कम हो जाता है। ऐसे में भविष्य में इन जगहों पर रोबोट सैनिकों की तैनाती की जा सकती है।


चीन से प्रेरित नई रणनीति

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जिस तरह चीन अपनी सीमाओं पर रोबोट का इस्तेमाल कर रहा है, उसी तरह भारत भी जल्द ही इस दिशा में कदम बढ़ाएगा। उन्होंने बताया कि हाल के महीनों में कुछ सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी सैनिकों की जगह रोबोट दिखाई देने की रिपोर्ट भी सामने आई है।


‘भार्गवास्त्र’ एंटी-ड्रोन सिस्टम भी तैयार

कार्यक्रम के दौरान यह भी जानकारी दी गई कि भारत जल्द ही एक अत्याधुनिक एंटी-ड्रोन सिस्टम Bhargavastra को सक्रिय करने जा रहा है।

इस सिस्टम की खासियत यह है कि यह दुश्मन के ड्रोन हमलों को रोकने के लिए एक साथ 60 छोटी लेकिन बेहद सटीक मिसाइलें दाग सकता है। माना जा रहा है कि यह सिस्टम दुनिया के कई विकसित देशों के सिस्टम से अलग और अधिक प्रभावी होगा।


नागपुर बन रहा डिफेंस हब

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि नागपुर तेजी से भारत का एक बड़ा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत का उद्देश्य किसी देश पर हमला करना नहीं है, बल्कि देश की सुरक्षा मजबूत करना और शांति बनाए रखना है। नई तकनीकों के जरिए भारत अपनी सीमाओं को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

 

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