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छत्तीसगढ़ में अब सिर्फ चित्रकोट नहीं… दुनिया देखेगी ये नया चेहरा! 2028 तक पर्यटन को ग्लोबल बनाने की तैयारी

रायपुर, 25 अगस्त 2026: छत्तीसगढ़ अब अपनी खूबसूरत वादियों, झरनों, जनजातीय संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की तैयारी में जुट गया है। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने मंगलवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में प्रेस वार्ता के दौरान विभाग की उपलब्धियों और आने वाले वर्षों की योजनाओं का खाका सामने रखा।

सरकार का लक्ष्य 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश और दुनिया के सामने स्थापित करना है। इसके लिए चित्रकोट, सिरपुर, मैनपाट और जशपुर जैसे पर्यटन स्थलों के विकास के साथ धार्मिक पर्यटन, होमस्टे, स्थानीय रोजगार, निजी निवेश, डिजिटल सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

चित्रकोट से सिरपुर तक बदलने वाली है तस्वीर

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे शानदार जलप्रपात, बस्तर और सरगुजा की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, सिरपुर जैसी ऐतिहासिक विरासत और मां दंतेश्वरी व मां महामाया जैसे प्रमुख आस्था केंद्र दिए हैं।

सरकार इन प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संपदाओं को देश-दुनिया के सामने नई पहचान देने की दिशा में काम कर रही है।

चित्रकोट को सिर्फ एक जलप्रपात नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की तैयारी है। वहीं सिरपुर के लिए विस्तृत एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटकों के अनुभव और सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम जारी है।

भोरमदेव कॉरिडोर के लिए 145.99 करोड़ मंजूर

धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भोरमदेव कॉरिडोर के विकास को भी बड़ी मंजूरी मिली है। भारत सरकार ने इसके विकास के लिए 145 करोड़ 99 लाख रुपये की स्वीकृति दी है।

इसके अलावा रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र समेत अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी भारत सरकार को भेजे गए हैं।

61 ट्रेनों से 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे अयोध्या-काशी

छत्तीसगढ़ सरकार की श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत अब तक 61 ट्रेनों का सफल संचालन किया जा चुका है। आईआरसीटीसी के सहयोग से इन ट्रेनों के जरिए 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए गए हैं।

सरकार का उद्देश्य धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को प्रदेश के लोगों के लिए ज्यादा सुगम और सुविधाजनक बनाना है।

पर्यटन से स्थानीय परिवारों को जोड़ने की तैयारी

सरकार पर्यटन का लाभ सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंचाने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इससे स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और युवाओं को पर्यटन से जोड़ने के अवसर बढ़ेंगे। वर्तमान में 390 से अधिक टूर ऑपरेटर और ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत हैं।

पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

निजी निवेश से पर्यटन को मिलेगा बड़ा बूस्ट

पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने की दिशा में भी सरकार ने कई कदम उठाए हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।

फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की योजना है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये है।

वहीं छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की तैयारी है। इससे करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश आने और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

मोबाइल से शुरू होगी पर्यटक की पूरी यात्रा

आज पर्यटक यात्रा की शुरुआत मोबाइल फोन से करता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप को ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल जानकारी और पर्यटन सुविधाओं से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से करीब 6 करोड़ 48 लाख रुपये और पर्यटन इकाइयों से लगभग 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

2028 तक ग्लोबल ब्रांड बनाने का लक्ष्य

मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में हर साल 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है।

प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में सतत विकास, निजी निवेश, समुदाय आधारित पर्यटन और स्थानीय भागीदारी को प्राथमिकता दी जाएगी।

छत्तीसगढ़ की इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर भागीदारी, फिल्म और ओटीटी के जरिए प्रचार, इंटरनेशनल मीडिया आउटरीच तथा विदेशी इन्फ्लुएंसर्स के फैम टूर जैसे प्रयास भी प्रस्तावित हैं।

कलाकारों को भी मिल रहा सहारा

पर्यटन के साथ संस्कृति और कलाकारों के संरक्षण पर भी सरकार का फोकस है। कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब 30 लाख 3 हजार रुपये की सहायता दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को 15 लाख 30 हजार रुपये की सहायता मिल चुकी है।

वहीं मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के तहत नृत्य, संगीत, लोकनाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी भाषा लेखन और अन्य लोककलाओं से जुड़े कलाकारों को संरक्षण और आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को करीब 19 लाख 8 हजार रुपये दिए गए हैं।

407 वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को पेंशन

आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 लोगों को 82 लाख 12 हजार रुपये की पेंशन दी गई है। इस वर्ष अब तक 121 वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को इसका लाभ मिल चुका है।

‘बस्तर पंडुम’ से दुनिया तक पहुंचेगी जनजातीय संस्कृति

बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को नई पहचान दिलाने के लिए पिछले दो वर्षों से ग्रामीण, ब्लॉक और जिला स्तर पर ‘बस्तर पंडुम’ का आयोजन किया जा रहा है।

इस वर्ष बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार दलों, मांझी-चालकी प्रतिनिधियों और पद्मश्री विभूतियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलने और सम्मान प्राप्त करने का अवसर मिला।

वहीं प्रदेश के अलग-अलग जिलों में सूचीबद्ध 89 विशिष्ट मेला-मड़ई, उत्सव-महोत्सव और समारोह पूरे वर्ष आयोजित किए जा रहे हैं।

लोककलाओं को मंच, संस्कृति का बनेगा डिजिटल खजाना

‘पावस प्रसंग’, ‘रंगतरंग’, ‘रंगपरब’ और ‘लोकरंग पर्व’ जैसे आयोजनों के जरिए पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी लोकविधाओं को मंच दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने के उद्देश्य से डिजिटल आर्काइव तैयार किया जा रहा है।

सिरपुर को विश्व धरोहर बनाने की तैयारी

छत्तीसगढ़ की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की पहल भी जारी है।

सिरपुर में बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं का अनूठा संगम है। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण की ओर से यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है।

इसके अलावा प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का काम किया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 12 संरक्षित स्मारकों में संरक्षण, उन्नयन और पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए फेसलिफ्टिंग की योजना तैयार की जा रही है।

रायपुर संग्रहालय में बनेगी नई ‘रियासत गैलरी’

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर के उन्नयन के लिए नई ‘रियासत गैलरी’ बनाने और मौजूदा गैलरियों के विकास का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

वहीं पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की तैयारी है। इसमें शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों के साथ छत्तीसगढ़ की मूर्त और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत को केंद्र में रखा जाएगा।

12 लाख पन्नों में छिपी है छत्तीसगढ़ की विरासत

छत्तीसगढ़ से संबंधित करीब 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन डिजिटल अभिलेखों को वेब अभिलेखागार पोर्टल के माध्यम से आम लोगों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है।

2750 साल पुरानी मानव बसाहट के मिले प्रमाण

पुरातत्व विभाग की खुदाई में भी छत्तीसगढ़ के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रमाण सामने आए हैं। रायपुर जिले के आरंग तहसील में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में हुए उत्खनन से करीब 2750 साल पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण मिले हैं।

उत्खनन में प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से लेकर कलचुरी काल तक के अवशेषों के साथ विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी और तांबे के सिक्के भी मिले हैं।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थल बनाने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है।

उन्होंने कहा कि सरकार छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए दीर्घकालिक योजना के साथ आगे बढ़ रही है।

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